फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Doctor advice Do not ignore obstructive sleep apnea

डॉक्टर की सलाह: ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया को न करें नजरअंदाज, क्लास या ऑफिस में दिखता है इसका लक्षण

Mon, 21 Feb 2022 02:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Feb 2022 02:01 PM IST
सार

डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि पॉलीसोनोग्रॉफी या स्लीप स्टडी टेस्ट से बीमारी का पता किया जाता है। इसमें मरीज की नींद के बारे में पता किया जाता है। इसके लिए मरीज को एक दिन भर्ती किया जाता है।

विज्ञापन
Doctor advice Do not ignore obstructive sleep apnea
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

क्लास या ऑफिस में बैठे-बैठे सो जाते हैं तो डॉक्टर से जरूर मिलें। क्योंकि, यह एक गंभीर बीमारी है, जिसे विज्ञान की भाषा में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया कहते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति बैठे-बैठे सो जाता है। सोते वक्त सांस लेने में दिक्कत होने से खर्राटे आते हैं। यह स्थिति लंबे समय तक बने रहने पर जानलेवा साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि महज .3 फीसदी मरीज ही इलाज के लिए आते हैं। खास बात यह है कि न तो इस बीमारी के बारे में लोग जानते हैं और न जानने के बाद इलाज कराने में रुचि दिखाते हैं।

विज्ञापन


आईएमए के सचिव व चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि यदि काम के बीच कोई सोता दिखे तो उसके नींद पैटर्न का ध्यान रखें और बार-बार ऐसा होने पर डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। हर माह इस तरह के तीन से चार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसकी बड़ी वजह है कि लोगों की दिनचर्या में बदलाव में हुआ है। लोग इस पर ध्यान नहीं देते। इसकी वजह से समस्या बढ़ती जाती है।
विज्ञापन


स्लीप एप्निया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सोते वक्त छाती से ऊपर के वायु मार्ग में बार-बार रुकावट आ जाती है। सोते समय ऐसी समस्या अधिक होती है। यह समस्या तब पैदा होती है, जब जीभ और तालु को सपोर्ट करने वाली मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। वायु मार्ग कम या बंद हो जाता है और कम समय के लिए सांस रुक जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

लक्षण को समझने की जरूरत

डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि खर्राटे लेने वाला हर व्यक्ति बीमार नहीं होता। लेकिन, अगर यह बीमारी है तो समस्या कभी भी बढ़ सकती है। आराम के समय नींद आना ठीक है, लेकिन काम करते हुए दिन में भी नींद आ रही है तो ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान यह ध्यान दें कि वजन तो नहीं बढ़ रहा है। गर्दन की मोटाई ज्यादा है और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 27 से अधिक है तो बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।

स्लीप स्टडी टेस्ट से पता चलती है बीमारी

डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि पॉलीसोनोग्रॉफी या स्लीप स्टडी टेस्ट से बीमारी का पता किया जाता है। इसमें मरीज की नींद के बारे में पता किया जाता है। इसके लिए मरीज को एक दिन भर्ती किया जाता है। उपचार के लिए सीपैप तकनीक इस्तेमाल करते हैं, जिस पर खर्च ज्यादा आता है। इलाज के लिए मैटलर एडवांस पैलेटल लिफ्टिंग और टंग रिटेनिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सीने से लगाया जाता है तो नींद के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके अलावा ऑक्सीमेट्री के जरिए पल्स ऑक्सीमीटर से खून में ऑक्सीजन की माप से पता किया जाता है।

बीमारी के कारण

मोटापा में हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम, अस्थमा, फेफड़े की समस्या या पल्मोनरी फाइब्रोसिस, अटैक के समय छाती की मांसपेशियों का मस्तिष्क से संपर्क टूटने पर वायुमार्ग में रुकावट। हार्ट अटैक-किडनी फेल होने पर तरल पदार्थ का गले में जमना।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed