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गोरखपुर में स्टिंग ऑपरेशन: डीएम ने बिछाया ऐसा जाल, फंस गया घूसखोर लेखपाल

Fri, 13 May 2022 11:10 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 13 May 2022 11:10 AM IST
सार

डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि लेखपाल पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। इस कार्य में यदि कोई अन्य भी लिप्त पाया गया तो उस पर भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जनहित एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति, शासन- प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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DM vijay kiran anand conducted sting operation in Tehsil case filed against Lekhpal
डीएम विजय किरन आनंद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में पैमाइश के लिए 16 हजार रुपये घूस मांगने के आरोप में सदर तहसील क्षेत्र के हल्का नंबर 65 में तैनात लेखपाल प्रवीण कुमार शाही के खिलाफ कैंट थाने में गुरुवार को भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ है। लेखपाल के घूसखोरी का स्टिंग ऑपरेशन डीएम विजय किरन आनंद ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर कुलदीप मीना के माध्यम से कराया है।

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स्टिंग ऑपरेशन में लेखपाल, पैमाइश कराने का आवेदन करने वाले व्यक्ति से 16 हजार रुपये घूस लेते कैमरे में कैद हो गया। इसके बाद नायब तहसीलदार नगर की तहरीर पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। फिलहाल, आरोपित लेखपाल की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वह पुलिस की पकड़ से दूर है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही लेखपाल के निलंबन की भी कार्रवाई होगी।
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जानकारी के मुताबिक, लेखपाल प्रवीण ने हाल ही में एक जमीन की पैमाइश के लिए घूस मांगी थी। इसकी शिकायत आवेदनकर्ता ने डीएम विजय किरन आनंद से की थी। डीएम ने एसडीएम सदर कुलदीप मीना को मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया। साथ ही लेखपाल को रंगे हाथ पकड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी। इसके बाद एसडीएम ने बृहस्पतिवार को लेखपाल का स्टिंग आपरेशन कराया।
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स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जो वीडियो बना है, उसके मुताबिक, लेखपाल 16 हजार रुपये घूस लेते हुए कैद हुआ। वीडियो में वह यह भी कहते सुना जा रहा है कि बाकी रुपये मिलने के बाद ही संबंधित जमीन की पैमाइश हो सकेगी। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार नगर ने कैंट थाने में भ्रष्टाचार अधिनियम एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।

 

प्राइवेट मुंशी तहसील छोड़कर भागे
लेखपाल प्रवीण कुमार शाही के खिलाफ बृहस्पतिवार को कार्रवाई होते ही पूरी तहसील में सनसनी फैल गई। लेखपाल-कानूनगो के प्राइवेट मुंशी तहसील छोड़कर भाग खड़े हुए, लेकिन सभी कर्मचारी अपने-अपने पटल पर मौजूद रहकर काम करते दिखे।  जिले की अन्य तहसीलों में भी लेखपाल से लेकर अन्य कर्मचारियों के बीच दिन भर इसी मामले पर चर्चा होती रही।

पिछले महीने ही 10 हजार घूस लेते पकड़ा गया था राजस्व कर्मी
चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल के एक मामले में एंटी करप्शन टीम ने पिछले महीने ही 10 हजार रुपये घूस लेते हुए राजस्व कर्मचारी सुशील कुमार मौर्य को पकड़ा था। इससे पहले डीएम विजय किरन आनंद के निर्देश पर भ्रष्टाचार के ही मामले में रजिस्ट्री और आरटीओ कार्यालय के 12 कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।

 

तहसीलों में नई नहीं है पैमाइश के लिए घूस मांगने की कहानी
तहसील में पैमाइश समेत कई अन्य कार्यों के लिए घूस मांगने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पैमाइश के लिए घूस मांगने पर विभिन्न तहसीलों के लेखपालों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। जाति, आय, निवास जैसे प्रमाणपत्रों के लिए भी लेखपाल और उनके अनाधिकृत मुंशी आवेदकों से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक वसूलते हैं। अगर पैसा नहीं दिया तो प्रमाण पत्र जारी करने में देरी करते हैं।   

डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि लेखपाल पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। इस कार्य में यदि कोई अन्य भी लिप्त पाया गया तो उस पर भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जनहित एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति, शासन- प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इंस्पेक्टर कैंट शशि भूषण राय ने कहा कि तहरीर के आधार पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया है। आरोपित लेखपाल की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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