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Gorakhpur News: राज्य अध्यापक पुरस्कार से बढ़ा जिले का मान, नवीन त्रिपाठी ने बदली स्कूल की तस्वीर
Tue, 01 Sep 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 01 Sep 2026 02:32 AM IST
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- कम बच्चों वाले विद्यालय में नियुक्ति के बाद लगातार प्रयासों से नामांकन 125 से बढ़कर 344 हुआ
- शिक्षा के साथ विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाने पर दिया जोर
गोरखपुर। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने और विद्यालय को नई पहचान दिलाने वाले पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव के शिक्षक नवीन कुमार त्रिपाठी का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 के लिए हुआ है। वर्ष 2018 में विद्यालय में नियुक्ति के समय यहां 125 विद्यार्थी ही पढ़ते थे। नवीन त्रिपाठी ने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय की पढ़ाई, अनुशासन, स्वच्छता और वातावरण को बेहतर बनाने पर लगातार काम किया।
बच्चों की नियमित उपस्थिति, अभिभावकों से संवाद और पढ़ाई को रुचिकर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका असर नामांकन पर पड़ा और वर्तमान में विद्यालय में 344 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में गतिविधि आधारित पढ़ाई, नवाचार, स्वच्छता, हरित परिसर और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई प्रयास किए गए। उद्देश्य यह रहा कि बच्चे विद्यालय में पढ़ाई के साथ सीखने और आगे बढ़ने का आनंद भी महसूस करें। लगातार किए गए प्रयासों से विद्यालय की छवि बदली और अभिभावकों का विश्वास बढ़ा।
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- शिक्षा के साथ विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाने पर दिया जोर
गोरखपुर। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने और विद्यालय को नई पहचान दिलाने वाले पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव के शिक्षक नवीन कुमार त्रिपाठी का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 के लिए हुआ है। वर्ष 2018 में विद्यालय में नियुक्ति के समय यहां 125 विद्यार्थी ही पढ़ते थे। नवीन त्रिपाठी ने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय की पढ़ाई, अनुशासन, स्वच्छता और वातावरण को बेहतर बनाने पर लगातार काम किया।
बच्चों की नियमित उपस्थिति, अभिभावकों से संवाद और पढ़ाई को रुचिकर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका असर नामांकन पर पड़ा और वर्तमान में विद्यालय में 344 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में गतिविधि आधारित पढ़ाई, नवाचार, स्वच्छता, हरित परिसर और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई प्रयास किए गए। उद्देश्य यह रहा कि बच्चे विद्यालय में पढ़ाई के साथ सीखने और आगे बढ़ने का आनंद भी महसूस करें। लगातार किए गए प्रयासों से विद्यालय की छवि बदली और अभिभावकों का विश्वास बढ़ा।
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