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रोगी सुरक्षा दिवस: तीन माह की जगह डेढ़ साल में कर रहे ओटी को विसंक्रमित, डेढ़ साल से नहीं हुई जांच

Sat, 17 Sep 2022 02:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 17 Sep 2022 02:29 PM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में संक्रमण का खतरा बैक्टीरीयल होता है। मरीजों में फंगल इंफेक्शन भी मिलते हैं। अगर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले ही साबुन से हाथ सही से धुलते हैं तो 50 फीसदी खतरा वहीं समाप्त हो जाता है।

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Disinfecting OT in one and a half year instead of three months
सांकेतिक फोटो। - फोटो : Social media

विस्तार

गोरखपुर जिले के सरकारी अस्पतालों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में तीन माह की जगह डेढ़ साल में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) को विसंक्रमित किया जा रहा है। यही हाल अन्य सरकारी अस्पतालों का भी है। ऑपरेशन थियेटर से लेकर इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) तक में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। इसके बाद भी संस्थान बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जांच नहीं करवा रहे हैं। इससे मरीजों को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।

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जानकारी के मुताबिक, जिले में 340 बेड का जिला अस्पताल, 300 बेड का महिला अस्पताल के अलावा 30-30 बेड के 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ सीएचसी में ऑपरेशन की सुविधा है।
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सीएचसी में सामान्य से लेकर सीजेरियन प्रसव भी होते रहते हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) और पीडियाट्रिक आईसीयू भी चल रहे हैं। जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग के लिए वार्ड और डायलिसिस यूनिट भी चलाई जा रही है।
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इन दोनों संस्थानों में दो-दो ऑपरेशन थियेटर हैं। लेकिन, इन संस्थानों की ओटी से लेकर एनआईसीयू, पीडियाट्रिक आईसीयू की जांच पिछले डेढ़ साल से नहीं हुई है। इससे मरीजों को संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। संक्रमण की जांच के लिए बीआरडी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को केंद्र भी बनाया गया है। लेकिन, संस्थान माइक्रोबोयोलॉजी को सैंपल तक नहीं भेज रही है। न ही टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जांच के दौरान यह पता चलता है कि कहीं ओटी या फिर एसएनसीयू में बैक्टीरिया, फंगस तो नहीं पनप रहे हैं। अगर पनपते हैं तो इसे विसंक्रमित किया जाता है। इससे मरीजों को संक्रमण का खतरा नहीं होता है।

डेढ़ साल से नहीं हुई जांच
जिला अस्पताल के हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. मुकुल द्विवेदी ने बताया कि 19 फरवरी 2020 को ओटी में संक्रमण की जांच हुई थी। महिला अस्पताल के हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. कमलेश ने बताया कि वर्ष 2021 में जांच हुई थी। उसके बाद से आज तक सैंपल नहीं भेजा गया।

हाथ धुलें तो 50 फीसदी संक्रमण खत्म
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में संक्रमण का खतरा बैक्टीरीयल होता है। मरीजों में फंगल इंफेक्शन भी मिलते हैं। अगर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले ही साबुन से हाथ सही से धुलते हैं तो 50 फीसदी खतरा वहीं समाप्त हो जाता है। इसके बाद ऑपरेशन थियेटर में लोग ग्लबस का इस्तेमाल करें।

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