शनि प्रदोष: भगवान शिव के साथ मिलेगी शनिदेव की कृपा, जानिए क्यों खास है ये व्रत
शिवजी के साथ होगी शनिदेव की पूजा, शनि प्रदोष व्रत 24 अप्रैल को किया जा रहा है।
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शनि प्रदोष व्रत 24 अप्रैल को किया जा रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को है इसलिए इसे शनि प्रदोष कहा जाएगा। इस व्रत को करने वाले श्रद्धालुओं को भगवान शिव के साथ शनिदेव की भी कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष का व्रत महत्व
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद ही की जाती है। इस दिन का महत्व है। इस दिन अगर शिवजी और मां पार्वती की पूजा की जाए तो व्यक्ति पर भगवान शिव कृपालु रहते हैं। इसके साथ ही भक्तों के जीवन से कष्टों का निवारण भी होता है।
जो प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ता है उसे करने से शनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अगर शनि प्रदोष व्रत किया जाए तो निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।
ऐसे करें पूजा
ज्योतिषाचार्य पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार शनि प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। उनके मंत्रों का जप करें। सुबह भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें। शनि प्रदोष व्रत का संकल्प लें और दिन भर व्रत रखें।
संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो और रात्रि का आगमन हो, उस समय को प्रदोष काल कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव साक्षात शिवलिंग में प्रकट होते हैं। इसीलिए इस समय शिव का स्मरण करके उनका पूजन किया जाए तो उत्तम फल मिलता है।