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Gorakhpur News: माघी पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान
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माघ पूर्णिमा के अवसर पर राजघाट राप्ती नदी में स्नान करने के बाद पूजा करते श्रद्धालु ।संवाद
- राप्ती तट पर रामघाट व गुरु गोरक्षनाथ घाट पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान व दान
-संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। माघी पूर्णिमा पर आस्था और श्रद्धा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। रविवार सुबह की पहली किरण के साथ व इससे पहले भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में राप्ती नदी के रामघाट व गुरु गोरक्षनाथ घाट पर पहुंचने लगे। हर-हर गंगे और जय गुरु गोरक्षनाथ के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पवित्र स्नान किया और दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित किया।
मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मन और तन शुद्ध होता है तथा जीवन के पाप नष्ट होते हैं। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत गोदान, अन्नदान, वस्त्रदान एवं जरूरतमंदों को दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। घाटों पर पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा और भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रद्धालु पूजा-अर्चना में लीन नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान करने से आत्मिक शांति की अनुभूति होती है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सुबह से शुरू हुआ स्नान-दान का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आवश्यक साफ-सफाई की गई थी।
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-संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। माघी पूर्णिमा पर आस्था और श्रद्धा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। रविवार सुबह की पहली किरण के साथ व इससे पहले भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में राप्ती नदी के रामघाट व गुरु गोरक्षनाथ घाट पर पहुंचने लगे। हर-हर गंगे और जय गुरु गोरक्षनाथ के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पवित्र स्नान किया और दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित किया।
मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मन और तन शुद्ध होता है तथा जीवन के पाप नष्ट होते हैं। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत गोदान, अन्नदान, वस्त्रदान एवं जरूरतमंदों को दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। घाटों पर पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा और भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रद्धालु पूजा-अर्चना में लीन नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान करने से आत्मिक शांति की अनुभूति होती है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सुबह से शुरू हुआ स्नान-दान का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आवश्यक साफ-सफाई की गई थी।
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