Gorakhpur Airport: दिव्यांग फेडरेशन के अध्यक्ष ने सुरक्षाकर्मियों पर अभद्रता के लगाए आरोप, कहा- इससे पीड़ा हुई
एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि दिव्यांग की शिकायत बिल्कुल गलत है। वह अपने साथ अपने कद से भी ऊंची लाठी ले आए थे, जिसमे लोहे की रॉड लगी थी। नियम के अनुसार, कमर के बराबर बेत की छड़ी ले जाने का नियम है।
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गोरखपुर एयरपोर्ट के सुरक्षा कर्मियों पर एम्स दिल्ली के दिव्यांग फेडरेशन के अध्यक्ष संतदेव चौहान ने अभद्रता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 85 प्रतिशत दिव्यांग होने के बाद भी लकड़ी की स्टिक फ्लाइट में नहीं ले जाने दी गई। इस वजह से उनकी एक फ्लाइट छूट गई। वहीं एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है अध्यक्ष नियम तोड़ रहे थे, अपने कद से भी ऊंची लाठी, जिसमे लोहे का रॉड भी लगा था, उसे लेकर प्रवेश करना चाह रहे थे, जो नियम के विरूद्ध है।
संतदेव चौहान का कहना है कि19 जनवरी को दिल्ली जाने के लिए एयरपोर्ट पर गया था। वहां पर सुरक्षाकर्मियों ने मेरी दिव्यांगता का मजाक उड़ाया। शरीर से 85 प्रतिशत दिव्यांग हूं, कहीं भी जाने के लिए लकड़ी की स्टिक का इस्तेमाल करता हूं। मैं अकेले ही दिल्ली जाने के लिए फ्लाइट की तरफ जाने लगा, इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने स्टिक ले जाने से रोक दिया। सुरक्षाकर्मियों ने बोला कि मानक के अनुसार स्टिक ही ले जा सकते हैं, ऐसे में मैं कहां से लाता। इनकी वजह से मेरी दिल्ली जाने वाली इंडिगो की 11:30 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट छूट गई। जिससे मेरा भारी नुकसान भी हुआ।
एयरलाइंस ने दूसरी फ्लाइट का दिया टिकट
संतदेव ने बताया कि निवेदन करने पर इंडिगो एयरलाइंस ने शाम 4:20 बजे दूसरी फ्लाइट में टिकट उपलब्ध कराया। मैं बिना स्टिक के ही फ्लाइट में सवार हुआ। वहां पर एयर होस्टेस से अपनी स्टिक ले जाने का निवेदन किया। मेरी परेशानी देखते हुए उन्होंने स्टिक लाने की अनुमति दे दी। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को भी समझाया। सुरक्षा कर्मियों के इस रवैये से मुझे गंभीर मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा है। इसके जिम्मेदार सुरक्षा कर्मियों पर दिव्यांग एक्ट 2016 के तहत कार्रवाई करके केस दर्ज करने की मांग की। संतदेव ने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला है, जो वायरल हो रहा है।
दिव्यांग की शिकायत बिल्कुल गलत है। वह अपने साथ अपने कद से भी ऊंची लाठी ले आए थे, जिसमे लोहे की रॉड लगी थी। नियम के अनुसार, कमर के बराबर बेत की छड़ी ले जाने का नियम है। उन्हें अच्छे से सुरक्षा कर्मियों ने समझाया, वे अपनी डयूटी निभा रहे थे। वह इस दौरान हल्ला गुल्ला कर रहे थे, जिससे एयरपोर्ट पर आए अन्य यात्रियों को परेशानी हुई। -आरके पराशर, निदेशक, एयरपोर्ट