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गोरखपुर में आस्था का विसर्जन: पोखरों में भरे अवशेषों की परवाह और न दुर्गंध की, सामान समेटने की मची होड़

Fri, 27 Oct 2023 10:52 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 27 Oct 2023 10:52 AM IST
सार

प्रतिमाओं के ढांचे में लगे बांस और पटरी को निकाल रहे लोगों ने बताया कि इसका इस्तेमाल झोपड़ी बनाने या फिर जलाने में करेंगे। अमरुतानी से आई विंद्रावती ने कहा कि वह बंधे के किनारे झोपड़ी बनाने के लिए लकड़ी निकाल रही हैं। यहां मिली आशा और मेवाती ने कहा कि इन बांसों से खेतों में बाड़ बनाएंगे। कुछ जलौनी के लिए लकड़ियां बटोर रहीं थीं।

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crowd for second day to take away wood used in statues
गोरखपुर में प्रतिमा विसर्जन के बाद सामान निकालते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर के राजघाट में राप्ती किनारे प्रतिमा विसर्जन के लिए बने पोखरे मलबे से पटे पड़े रहे। नगर निगम ने सफाई की सुध ही नहीं ली। बृहस्पतिवार को न तो पोखरों को साफ किया गया और न आसपास सफाई कराई गई। अब पोखरे के पानी से दुर्गंध भी आने लगी है। वहीं, प्रतिमाओं के अवशेष बटोरने की होड़ बृहस्पतिवार को भी दिखी। लोग पूजन सामग्री, प्रतिमाओं के अवशेषों के साथ आस्था को पैरों तले रौंदते रहे।

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शहर में नौ दिनों की पूजा के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन मंगलवार से शुरू हुआ। विसर्जन के लिए राजघाट में राप्ती के किनारे नगर निगम की ओर से तीन पोखरे बनाए गए। डोमिनगढ़, चिलुआताल सहित अन्य जगहों पर ऐसे ही इंतजाम थे। बृहस्पतिवार को भी विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। लेकिन तीन दिनों से हो रहे विसर्जन के बाद पोखरों की साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया। इतना ही नहीं रामघाट और गुरु गोरखनाथ घाट पर भी गंदगी नजर आई। जगह-जगह पूजन सामग्री और तस्वीरें फेंकी पड़ी थीं।
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घाटों और पोखरों के पास गंदगी देख लोगों ने नाराजगी भी जताई। कहा कि प्रशासन को सफाई का पूरा इंतजाम किया जाना चाहिए।

 

किसी ने चलाई आरी तो किसी ने जैसे-तैसे निकला अवशेष

crowd for second day to take away wood used in statues
गोरखपुर में प्रतिमा विसर्जन के बाद सामान निकालते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

प्रतिमाओं को विसर्जित किए जाने के बाद नगर निगम की जेसीबी से बुधवार को सफाई कराई जा रही थी। लेकिन बृहस्पतिवार को कम विसर्जन होने से इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। इससे प्रतिमाओं का बांस का ढांचा, लकड़ी सहित अन्य सामान पोखरों में पड़ा रहा। बृहस्पतिवार की दोपहर में यहां पोखरों से सामान निकालने की होड़ मची दिखी। एक पोखरे में युवक और एक किशोर ढांचा निकालने के लिए उसे आरी से काटते रहे।

कोई बनाएगा झोपड़ी तो किसी के काम आएगी जलौनी
प्रतिमाओं के ढांचे में लगे बांस और पटरी को निकाल रहे लोगों ने बताया कि इसका इस्तेमाल झोपड़ी बनाने या फिर जलाने में करेंगे। अमरुतानी से आई विंद्रावती ने कहा कि वह बंधे के किनारे झोपड़ी बनाने के लिए लकड़ी निकाल रही हैं। यहां मिली आशा और मेवाती ने कहा कि इन बांसों से खेतों में बाड़ बनाएंगे। कुछ जलौनी के लिए लकड़ियां बटोर रहीं थीं। महिलाओं ने प्रतिमाओं से निकाले कपड़ों से परदा और खोल बनाएंगे।

रुपये तलाशते रहे बच्चे
विसर्जन स्थल पर बच्चों की धमाचौकड़ी कम नहीं थी। प्रतिमाओं की गोदभराई में पड़े रुपयों को बच्चे खोजते रहे। वे सभी पोटली खोलकर देखे रहे थे। किसी को सिक्के मिले तो किसी को नोट।
 

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गोरखपुर में प्रतिमा विसर्जन के बाद सामान निकालते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

यह श्रद्धा और दिखावे की प्रतिद्वंद्विता है। बाजार और मीडिया ने तथाकथित मध्यवर्ग को दिखावे की अंधी दौड़ में शामिल कर दिया है। विसर्जन के लिए जैसी तैयारी होनी चाहिए वह नहीं होती है। आधी-अधूरी तैयारी की वजह से ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। -प्रो. चितरंजन मिश्र, समाजवादी चिंतक।

धूमधाम और मनोयोग से लोग नवरात्र मनाते हैं। हमें यह ध्यान रखना होगा कि मां की प्रतिमा विसर्जित करते समय पूजा और प्रतिमा से जुड़ी हुई सामग्री इधर-उधर न फेंके। इसे भी आस्था और सम्मान के साथ उचित स्थान पर विसर्जित करें।-प्रो. अजय कुमार शुक्ला, अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, डीडीयूजीयू।

 

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आस्था और परंपरा... इसके निर्वहन की जिम्मेदारी हमारी

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गोरखपुर में प्रतिमा विसर्जन के बाद सामान निकालते लोग। - फोटो : अमर उजाला।
कोई भी त्योहार हमारी आस्था व परंपरा से जुड़ा है। अगर इसके निर्वहन में लापरवाही बरती जा रही है तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। हम जिस आस्था से पूजा-पाठ करते हैं, उसी आस्था से देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी करना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जिससे आस्था को ठेस पहुंचे। -आरएन सिंह, अध्यक्ष चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज, गोरखपुर।

मूर्तियों के साथ एक सा सम्मान होना जरूरी
ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स निदेशक वैभव सराफ ने कहा कि दशहरा या कोई भी पर्व, मूर्तियों के साथ एक सा सम्मान होना चाहिए। इन मूर्तियों को घर लाते समय से देवी मां होती हैं। तो इनके विसर्जन भी इसी भाव के साथ लोगों को करना चाहिए। पूजा-पाठ लोक कल्याण के लिए होता है। लेकिन, इसे मस्ती तक सीमित करना चिंताजनक है। समझदारी के साथ सभी मां की आस्था को महत्व दें और पूरे श्रद्धाभाव से विसर्जन भी करें।

 
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