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Gorakhpur News: करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी खतरे के मुहाने पर खड़े हैं गोरखपुर शहरवासी

Wed, 22 Mar 2023 01:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 22 Mar 2023 01:43 PM IST
सार

एनजीटी ने जुर्माने की कार्रवाई के पीछे भी यही तर्क दिया था कि राप्ती नदी और रामगढ़ताल में गिर रहा गंदा पानी जापानी इंसेफेलाइटिस की वजह बन सकता है। रामगढ़ताल में आरकेबीके से लेकर पैड़लेगंज तक 18 नालों का पानी सीधे गिर रहा है।

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Crores of rupees were spent residents of Gorakhpur standing at edge of danger
रामगढ़ताल में गिर रहा गंदा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

करोड़ों लोगों की आस्था की प्रतीक राप्ती नदी और मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रामगढ़ताल में आज भी नाले और नालियों का गंदा पानी गिर रहा है। जबकि, इसे शुद्ध करने में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं। रामगढ़ताल में तो अभी सीवर लाइन का काम भी पूरा नहीं हो सका है। वहीं, राप्ती नदी में ही करीब साढ़े सात करोड़ लीटर गंदा पानी गिर रहा है। यह समय भी संक्रामक बीमारियों का है। ताल में गंदा पानी गिरता रहेगा तो मच्छर बढ़ेंगे ही, लोगों के बीमार होने का खतरा भी बना रहेगा।

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एनजीटी ने जुर्माने की कार्रवाई के पीछे भी यही तर्क दिया था कि राप्ती नदी और रामगढ़ताल में गिर रहा गंदा पानी जापानी इंसेफेलाइटिस की वजह बन सकता है। रामगढ़ताल में आरकेबीके से लेकर पैड़लेगंज तक 18 नालों का पानी सीधे गिर रहा है। यहां सीवर लाइन बिछाकर उसे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाना है। लेकिन, सीवर लाइन बिछाने का काम भी 70 फीसदी ही हो सका है।
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इसी तरह शहर के नौ बड़े नालों और 18 छोटी नालियां के मार्फत घरों से गंदा पानी राप्ती नदी को मैला कर रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद नालियों के पानी को बायोरिमेडिएशन से शोधित करके गिराया जाने लगा। इस विधि में ब्लॉक बनाकर बैक्टीरिया डाल देते हैं जो पानी को साफ करते रहते हैं। लेकिन, अब पानी के शोधन की यह प्रक्रिया भी नियमित की जाती है।
 

राप्ती में 25 हजार घरों का गिर रहा गंदा पानी

शहर में नालों की लंबाई करीब 61 किलोमीटर है। राप्ती नदी में प्रतिदिन करीब 55 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी गिरता है। सबसे अधिक गंदगी सिविल लाइंस, कार्मल स्कूल, पुलिस लाइंस, धर्मशाला बाजार, जाफरा बाजार से इलाहीबाग तक जाने वाले नाले से होती है। इस नाले से 25 हजार से अधिक घरों का पानी राप्ती नदी में पहुंचता है।

डॉक्टर की राय
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि जलजनित बीमारियों से मेंजेटाइटिस, ट्रेकोमो (अंधापन), इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। रामगढ़ताल और राप्ती नदी में यदि गंदा पानी गिर रहा है तो आसपास के लोगों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। संक्रामक बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है।

जलनिगम अधिशासी अभियंता रतनसेन सिंह ने कहा कि सीवर लाइन बिछाने का 70 फीसदी का पूरा हो गया है। जल्द ही इसे पूरा कराकर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाएगा। राप्ती व रोहिन नदी में गिरने वाले गंदे पानी को साफ करने की परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। इस काम को पूरा होने में तीन साल लगेंगे। शासन की प्राथमिकता के आधार पर इसे कराया जा रहा है।

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