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गोरखपुर: विजिलेंस इंस्पेक्टर-जेई व एसडीओ समेत सात लोगों पर धोखाधड़ी का केस, कोर्ट ने दिया आदेश

Thu, 09 Dec 2021 03:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 09 Dec 2021 03:08 PM IST
सार

महिला ने रिश्वत न देने पर बिजली चोरी में फंसाने का आरोप लगाया था, न्यायालय के आदेश पर तिवारीपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।

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Vigilance Inspector-JE and SDO seven people including fraud case in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बिजली उपभोक्ता शहनाज बानो की शिकायत पर तत्कालीन विजिलेंस इंस्पेक्टर निर्भय नारायण सिंह, एसडीओ आरके सिंह, जेई सुनील यादव, मुकेश पटेल और दो प्राइवेट लाइनमैन मनोज और संदीप समेत समेत कुछ अज्ञात लोगों पर तिवारीपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। न्यायालय ने अवैध वसूली, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, गाली देने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज करके संबंधित थाने को तफ्तीश करने के आदेश दिए थे।

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दरअसल, तिवारीपुर थानाक्षेत्र की इलाहीबाग आगा मस्जिद की शहनाज ने आरोप लगाया था कि चेकिंग के समय उनके घर बिजली निगम की एक टीम आई थी और बताया कि उनके घर का मीटर धीमी गति से चल रहा है, टीम ने तत्काल इसे ठीक कराने को कहा। महिला ने विभाग के लोगों को बताया कि अभी घर पर उनके पति और कोई अन्य जिम्मेदार नहीं है। शाम को उनके आने के बाद वह मीटर ठीक करा देंगी। उस समय तो टीम वापस चली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद, बिजली निगम की टीम फिर आई और पोल से उनके घर तक गए बिजली कनेक्शन को काटने लगे।
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महिला के पूछने पर टीम ने कहा कि इसके लिए ऊपर से आदेश है। आरोप है कि बिजली न काटने के एवज में अधिकारियों ने महिला से 40 हजार रुपये की डिमांड की और 10 हजार रुपये तत्काल लेकर 30 हजार रुपये शाम तक देने की बात करने पर अधिकारी वापस चले गए। शाम में जब महिला के पति खुर्शीद को घर आने पर इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लाइनमैन से प्रकरण के बारे में पूछा। खुर्शीद ने शेष 30 हजार रुपये देने से इनकार भी कर दिया।

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ग्राहक को लाइनमैन ने धमकाया

इस पर लाइनमैन ने कहा कि अगर रुपये नहीं दिए तो विजिलेंस चेकिंग कराकर तुम लोगों को बिजली चोरी के केस में फंसा देंगे। आरोप है कि दो दिन बाद 12 अक्तूबर को दोपहर में विजिलेंस इंस्पेक्टर निर्भय नारायण सिंह, एसडीओ आरके सिंह, जेई सुनील यादव व मुकेश पटेल, प्राइवेट लाइनमैन मनोज और संदीप के साथ पहुंचे और घर का बिजली मीटर तोड़ दिया।


टीम ने परिवार पर ही आरोप लगा दिया कि उनके मीटर की सील टूटी हुई है। इस तरह से टीम ने परिवार पर करीब 1.41 लाख रुपये की पेनाल्टी भी लगा दी। आरोप है कि टीम ने इसके एवज में 50 हजार रुपये की डिमांड भी की और न देने पर अधिकारियों ने परिवार पर बिजली चोरी का केस दर्ज करा दिया। महिला शहनाज बानो ने पहले तो इसकी शिकायत पुलिस और अधिकारियों से की, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरन उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

 

विभागीय जांच में हटा था बिजली चोरी का मुकदमा

छह फरवरी को विभागीय जांच पूरी कर टीम ने मामले की रिपोर्ट मुख्य अभियंता को सौंपी थी। जांच में कमेटी ने पाया कि बिजली चोरी के प्रमाण उनके कनेक्शन या उपभोक्ता द्वारा नहीं मिले थे। उनकी रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्य अभियंता ने निगम के अधिकारियों को संबंधित मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

तत्कालीन जांच अधिकारी अधिशासी अभियंता एएच खान ने परीक्षण खंड के अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका को संदिग्ध माना था। खुर्शीद ने बताया कि पूरे मामले की जांच वीडियो अन्य प्रमाण के साथ पीड़ित ने सीएम पोर्टल पर की थी। इसी का नतीजा था कि उन्हें न्याय मिल सका।
 

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

धारा 467 में आजीवन कारावास की सजा है
वरिष्ठ अधिवक्ता केएन तिवारी ने बताया कि बेईमानी पूर्ण आशय से, अनाधिकृत रूप से संपत्ति प्राप्त करने के लिए फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसका असली के रूप में उपयोग करना ये तीनों 467, 468 और 471 आईपीसी की धाराओं का अपराध है। दोष सिद्ध होने पर 467 आईपीसी में आजीवन कारावास की सजा है।

आरोपी तत्कालीन विजिलेंस इंस्पेक्टर निर्भय नारायण सिंह ने कहा कि विजिलेंस की जांच में उपभोक्ता चोरी करते मिला था। रिपोर्ट पर एंटी पावर थेफ्ट थाने में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे के संबंध में प्रभारी एंटी थेफ्ट की विवेचना में चोरी से बिजली उपभोग किए जाने का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया है। न्यायालय के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जरूरत पड़ने पर विजिलेंस की तरफ से उस समय की गई जांच के वीडियो और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

 
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