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क्राइम: छोटू सिंह हत्याकांड की फाइल फिर से खोलने की तैयारी, माफिया सुधीर पर कसा शिकंजा

Tue, 13 Apr 2021 11:42 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 13 Apr 2021 11:42 AM IST
सार

  • 2013 में एक ब्रह्मभोज में गोलियों से भूनकर की गई थी छोटू की हत्या
  • तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट, खोजे नहीं मिल रही पत्रावली

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Police will reopen Chotu Singh murder case in Gorakhpur
ब्लॉक प्रमुख माफिया सुधीर सिंह।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में बहुचर्चित छोटू सिंह हत्याकांड की फाइल फिर से खोलने की तैयारी है। एसएसपी ने कोर्ट से पत्रावली को वापस कराने की प्रक्रिया शुरू का निर्देश मातहतों को दिया है। साथ ही वादी से फिर से संपर्क किया जा रहा है।

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उधर, खबर है कि पुलिस ऑफिस से इस केस से संबंधित पत्रावली गायब हो गई है। उसे खोजा जा रहा है लेकिन मिल नहीं पा रही है। एसएसपी के सख्ती के बाद पत्रावली खोजने का काम तेज कर दिया गया है। एसएसपी का कहना है कि जांच कराई जा रही है कि पत्रावली जानबूझकर तो नहीं गायब करा दी गई।
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जानकारी के मुताबिक, 10 नवंबर 2013 को शिवपुर सहबाजगंज निवासी बिजेंद्र सिंह उर्फ छोटू सिंह की कारबाइन और पिस्टल से गोली मारकर फिल्मी अंदाज में हत्या की गई थी। एक ब्रह्मभोज में पहुंचे छोटू सिंह पर अचानक बदमाशों ने हमला किया था। बदमाश चारपहिया वाहन से पहुंचे थे।
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इस मामले में छोटू सिंह की पत्नी ने माफिया व निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख सुधीर सिंह, उसके भाई उदयवीर सिंह सहित 10 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कराया था। तब पुलिस ने सुधीर सिंह के नजदीकी रिश्तेदार को गिरफ्तार कर चारपहिया बरामद की थी। लेकिन बाद में सुधीर का नाम केस से बाहर हो गया था। इस सिलसिले में सुधीर सिंह का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।  

देवरिया ट्रांसफर हो गई थी विवेचना
इस मामले की विवेचना देवरिया जिले में ट्रांसफर हो गई थी। देवरिया क्राइम ब्रांच में तैनात रहे एसआई बीबी सिंह ने सुधीर सिंह सहित चार को क्लीनचिट दे दी थी। मामले की जानकारी होने पर तत्कालीन एसएसपी आरके भारद्वाज ने डीआईजी और आईजी को पत्र लिखकर मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की। तब सामने आया कि घटना के गवाह अपने बयान से मुकर गए और विवेचक ने वादी के समझौता करने का हवाला देते हुए सुधीर सिंह का नाम केस से बाहर कर दिया। सीनियर पुलिस अफसरों के ट्रांसफर के बाद मामले दबता चला गया।

 

तत्कालीन आईजी ने इन बिन्दुओं पर उठाया था सवाल

  • घटना में नामजद सुधीर सिंह माफिया सरगना है और शाहपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 23 मामले दर्ज हैं। उसपर छोटू सिंह हत्याकांड को अंजाम देने की बात सामने आई थी, लेकिन उसकी तत्काल गिरफ्तारी न करते हुए विवेचकों ने पर्याप्त मौका दिया, जिससे उसकी ओर से गवाहों को तोड़ने का प्रयास किया गया।
  • प्रथम विवेचक ने घटना के दिन से ही छह आरोपितों में से मात्र दो के खिलाफ कार्रवाई की। शेष चार आरोपितों के खिलाफ कोई साक्ष्य एकत्रित करने का प्रयास नहीं किया गया।
  • घटना में प्रयुक्त दो गाड़ियों में एक की बरामदगी की गई, जबकि दूसरी अब तक बरामद नहीं हो सकी है।
  • नामजद आरोपित अखिलेश चौहान को पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर एक पिस्टल व कारतूस की बरामदगी की गई, लेकिन उससे अन्य आरोपितों के संबंध में पूछताछ नहीं की गई।
  • क्राइम ब्रांच देवरिया के विवेचक ने नामजद/प्रकाश में आए आरोपित सुधीर सिंह, विपिन सिंह, उदयवीर सिंह व बीएन सिंह के खिलाफ न्यायालय में एनबीडब्ल्यू के लिए रिपोर्ट दी। न्यायालय ने सुधीर सिंह के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी भी कर दी, लेकिन इन साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए विवेचक ने इन आरोपितों की नामजदगी गलत करार दे दिया। इस संदर्भ में विवेचक ने सक्षम अधिकारी से अनुमोदन भी प्राप्त नहीं किया।

एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा कि छोटू सिंह हत्याकांड की फाइल फिर से खोली जाएगी। इससे संबंधित फाइल को न्यायालय से मंगाने के लिए प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया है। इसकी पत्रावली गायब है, उसे भी खोजा जा रहा है। कहीं फाइल जानबूझकर गायब तो नहीं की गई, इसकी भी जांच कराई जाएगी।
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