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हैवानियत: मकान मालिक के बेटे-भतीजे ने हवस का शिकार बनाया, अब दूसरों को हैं 'परोसते'

Sun, 22 Aug 2021 11:14 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 22 Aug 2021 11:14 AM IST
सार

सीएम कैंप कार्यालय के निर्देश और इतने गंभीर आरोप पर भी इंस्पेक्टर को मौके पर जाने की फुरसत नहीं, मातहत ने कहा, किराएदारी का विवाद, बिना वैज्ञानिक जांच-पड़ताल के इंस्पेक्टर ने मान लिया।

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Landlord son and nephew made victim of lust and supply to other
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 13 साल की एक किशोरी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में पहुंचकर शिकायत की कि उसके मकान मालिक के बेटे-भतीजे ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया और अब उसे दूसरों के साथ सोने को मजबूर करते हैं। वह मना करती है तो बेल्ट और लाठी से उसकी पिटाई करते हैं।

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कैंप कार्यालय प्रभारी ने ऐसा गंभीर आरोप सुनते ही तिवारीपुर थाने के इंस्पेक्टर नासीर को फोन करके तत्काल कार्रवाई करके अवगत कराने को कहा, मगर उन्हें 24 घंटे बाद भी फुसरत नहीं मिली। मौके पर एक एसआई को भेज दिया, उसने आकर बताया कि मामला किराएदारी के विवाद का लग रहा है, सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप की कोई वैज्ञानिक जांच कराए बिना इंस्पेक्टर ने मान भी लिया। अमर उजाला संवाददाता के सवाल के जवाब में बोले, कोई मिल गया होगा कि चलो वहां अप्लीकेशन दे दो, दबाव बन जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक तिवारीपुर थाना क्षेत्र के निजामपुर मुहल्ला निवासी 13 वर्षीय एक किशोरी शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पहुंची। उसने कार्यालय प्रभारी मोतीलाल सिंह को एक प्रार्थना पत्र दिया। उनसे अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वह तिवारीपुर थाना क्षेत्र में अपने पिता व मां के साथ किराए के मकान में रहती थी।
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उसका परिवार बहुत ही गरीब है। पिता रिक्शा चलाता है तथा मां इधर-उधर से मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती थी। एक दिन मकान मालिक का बेटे तथा भतीजे दोनों ने उससे दुष्कर्म किया। विरोध किया तो जान मारने की धमकी देने लगे। उसके बाद दोनों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया।

पीड़ित किशोरी ने बताया कि अब वह लोग उसे पैसों के लिए दूसरी जगह ले जाते हैं और दूसरे लोगों के साथ सोने को मजबूर करते हैं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हैं। विरोध के कारण कई बार लाठी और बेल्ट से उसकी पिटाई की गई। उसने बताया कि उसे हाल ही घर से निकाल दिया, वह दूसरी जगह रहने लगी तो जबरिया वहां से ले जाकर उससे धंधा कराया जाता है। सीएम कैंप कार्यालय प्रभारी ने उसकी बात सुनने के तुरंत बाद थानाध्यक्ष तिवारीपुर, नासीर हुसैन को फोन लगाया। कहा कि उनके थाना क्षेत्र में रहने वाली एक गरीब किशोरी के साथ इस तरह का अन्याय हो रहा है। इस पर तुरंत कार्रवाई कर उन्हें अवगत कराएं।

पुलिसवाले मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की भी नहीं सुनते
हैरत की बात है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से शिकायत मिलने के बाद भी तिवारीपुर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 13 साल की लड़की सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत कर रही है। किशोरी कह रही है कि उसे दो लोगों ने दुष्कर्म का शिकार बनाया और अब उसे दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हो सकता है कि किशोरी सिरे से झूठ बोल रही है, मगर क्या ऐसे गंभीर आरोप पर थाना इंचार्ज को भागते हुए मौके पर नहीं जाना चाहिए था? तथ्यों को समझकर मुकदमा दर्ज करके मेडिकल नहीं करवाना चाहिए था? मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक क्या आगे की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी? पुलिस की इस सक्रियता से सब दूध का दूध, पानी का पानी हो जाता।

इसके ठीक उलट इंस्पेक्टर ने एक एसआई को मौके पर भेज दिया, उसने आकर उन्हें बता दिया कि किराएदारी का विवाद लग रहा है। कोई वैज्ञानिक जांच पड़ताल नहीं, बस इंस्पेक्टर महोदय ने मान लिया कि ये किराएदारी का विवाद है। अमर उजाला संवाददाता ने इंस्पेक्टर से इस बाबत पूछा तो बड़ी कैजुअली बोले- ये तो किराएदारी का विवाद लग रहा है। लड़की के परिवारवालों को बुलाया था, वे आए ही नहीं। जब उनसे पूछा गया कि लड़की का परिवार तो कहीं और रहने लगा, फिर कैसा विवाद? इस पर इंस्पेक्टर नासीर बोले- कोई मिल गया होगा कि चलो वहां अप्लीकेशन दे दो, दबाव बन जाएगा।

सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से आया मामला और पुलिस का ऐसा रवैया, आप क्या कहेंगे? इस सवाल पर अनायास ही किसी की भी जुबान पर शायद यही जवाब आएगा, ऐसे ही पुलिसवालों के चलते सरकार को हाथरस में फजीहत झेलनी पड़ी थी। पुलिस की ऐसी निष्क्रियता के चलते ही विपक्ष को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गृह जनपद में घेरने का बैठे बिठाए मौका मिल जाता है। हां, आप एक बार जरूर सोचिएगा, मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय से भेजे गए फरियादी को लेकर पुलिस का ऐसा रवैया है तो आम आदमी की शिकायत पर क्या होता होगा?

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