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लॉकडाउन में रोजगार छूटा तो अपराध के दलदल में कूद गए ये लोग, किसी ने हत्या तो कुछ ने लूट की घटना को दिया अंजाम

Wed, 20 Jan 2021 02:39 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 20 Jan 2021 02:39 PM IST
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Corona effect story of People become criminals after left job in lockdown
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर पुलिस ने जिले में 300 नए गुंडे चिह्नित किए हैं। इनका पहले से कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। पुलिस का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों का रोजगार छूटा तो इनमें से कई अपराध के दलदल में कूद गए। कुछ पुराने विवाद सुलझाने की कोशिश में आरोपी हो गए तो कुछ हत्या और लूट के अपराध में जेल चले गए।  
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केस एक
दस जनवरी को कुसम्ही जंगल में एक अधेड़ का गला रेतकर फेंका गया। इसमें तीन लोगों को जेल भेजा गया। एक अमित साहनी भी था जो लॉकडाउन में बाहर से आया था और ऑटो चलाता था, लेकिन रुपयों के लालच में अपराध करके जेल चला गया।
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केस दो
नवंबर में राकेश नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई। पता चला कि लॉकडाउन से पहले वह अपने दोस्तों के साथ मुंबई में रहता था और पेंट पॉलिश का काम करता था। दोस्तों को उसने रुपये उधार दिए थे। उसी रुपये को वापस मांगने पर हत्या कर दी गई। दोस्तों के पास रोजगार नहीं था।
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केस तीन
खजनी इलाके में रामकिशुन और अर्जुन के बीच जमीन के विवाद में मारपीट हो गई। रामकिशुन मुंबई में पेंट पॉलिश का काम करता था। वापस आने पर खेत की पैमाइश कराने को बोला। इसी बात पर उसका भाई से विवाद हो गया। रामकिशुन को जेल जाना पड़ा।

दिखावे को ऑटो और ठेला भी लगाया

पुलिस के अनुसार, जिले में 300 नए गुंडे ही नहीं, बल्कि 68 नए गैंग भी चिह्नित किए गए हैं। उम्र के 40 साल पार कर चुके लोग अपराध में पकड़े जा रहे हैं। तेजी से बढ़े नए अपराधियों को देखते हुए डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने नए गैंग को चिह्नित करने का काम शुरू करा दिया है।

छोटे अपराध को छोड़ दें तो बड़े अपराध में अधिकतर नए लोगों के नाम सामने आए हैं। इसमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो लॉकडाउन से पहले कहीं पर रहकर नौकरी आदि करते थे। कोरोना काल में नौकरी और काम छूटने पर घर-गांव लौटे तो पहले रोजगार की तलाश की, नहीं मिला तो अपराध की ओर कदम बढ़ा दिए।

वहीं, कई लोग वाहन चोरी के मामले में भी जेल भेजे गए हैं, जिनका पहले अपराध से कोई नाता नहीं है। पुलिस भी मानती है कि बेरोजगारी की वजह से ऐसे लोगों ने अपराध का रास्ता पकड़ लिया है।
 
जेल भेजे गए कई बदमाश ऐसे हैं जो घर लौटने के बाद ऑटो चलाने का काम किए तो कइयों ने ठेला भी लगाया, मगर रात में अपराध में संलिप्त हो गए। गगहा में हुई ईंट-भट्ठे पर लूटपाट में भी जीजा-साले को पुलिस ने पकड़ा था। वह दिन में ऑटो चलाते थे और रात में वारदात को अंजाम देते थे।

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