देवरिया: सड़क हादसे के मामले में 23 साल बाद अदालत ने सुनाया ये फैसला, इन अधिकारियों को ठहराया कसूरवार
अदालत ने जिलाधिकारी व अधिशासी अभियंता की लापरवाही पाए जाने पर मृतक के परिजनों को चालीस लाख रुपये क्षतिपूर्ति और केस दाखिल होने की तिथि से सात प्रतिशत ब्याज सहित एक माह के अंदर परिजनों को देने का आदेश दिया है।
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के एक मामले में अपर जिला जज अजय कुमार ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। उन्होंने अपील पर सुनवाई के पश्चात तत्कालीन जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को दोषी पाते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने जिलाधिकारी व अधिशासी अभियंता को दायित्व के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर हुई दुर्घटना के लिए मृतक के परिजनों को चालीस लाख रुपये क्षतिपूर्ति और केस दाखिल होने की तिथि से सात प्रतिशत ब्याज सहित एक माह के अंदर परिजनों को देने का आदेश दिया है।
31 दिसंबर 1998 को आठ बजे देर शाम गौरी बाजार के आजाद चौक निवासी रविंद्र कुमार गुप्ता बाइक से हाटा गौरी बाजार मार्ग पर घर आ रहे थे, बीच सड़क के किनारे रखे गए साइफन से टकरा जाने के कारण घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
मृतक की पत्नी विमला गुप्ता व उनके पुत्र व पुत्रियों ने जिलाधिकारी वह उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पर क्षतिपूर्ति का मुकदमा सिविल जज की अदालत में दाखिल किया। अदालत ने दोनों को चालीस लाख की क्षतिपूर्ति का मुकदमा दाखिल करने की तिथि से सात प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह के अंदर मृतक के परिजनों को देने का आदेश दिया है।