गोरखपुर: पार्षदों ने संसदीय कार्य व्यवस्था पर उठाए सवाल तो नगर आयुक्त ने प्रभारी को चेताया
सुबह 11 बजे से शुरू हुई बैठक दोपहर तीन बजे तक चल रही थी। कुछ पार्षदों ने लंच की बात कही। इस पर कुछ पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि लंच के बाद बैठक को खत्म न कर दिया जाए। मेयर और नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि बैठक लंच के बाद भी चलेगी।
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नगर निगम बोर्ड की बैठक के शुरू में ही पार्षदों ने संसदीय कार्य व्यवस्था पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। कहा कि प्रोसिडिंग और अनुपालन में इतना अंतर है कि पार्षद को खुद समझ नहीं आ रहा है। इसे पूरा स्पष्ट करना चाहिए।
पार्षद रणंजय सिंह जुगनू ने सबसे पहले अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रोसिडिंग में पार्षदों की तरफ से रखे गए सवाल होते हैं। सीवरलाइन की बात पर एम्स परिसर को सीवर से जोड़कर अनुपालन आख्या में उल्लेख कर जवाब दिया गया है। जबकि, एम्स का अपना परिसर है और बाहर की तरफ सीवर लाइन की शिकायत थी। इससे साफ है कि संसदीय प्रभारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
बिछिया के पार्षद राजेश कुमार ने कहा कि प्रोसिडिंग में कल्याण मंडपम की बात कही गई थी। जबकि, अनुपालन आख्या में कूड़ाघर लिखकर उसे दिखाया गया है। इसके अलावा अनुपालन आख्या पर संसदीय प्रभारी का हस्ताक्षर भी नहीं था। इस पर भी सभी पार्षदों ने आपत्ति जताई। यह सुनकर नगर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। कहा कि ये पहली और अंतिम चेतावनी है। सभी अनुपालन आख्या पर हस्ताक्षर कर पार्षदों को उपलब्ध करवाया जाए। अगली बार से किसी प्रकार की त्रुटि माफ नहीं की जाएगी। ये लिपिकीय या प्रिंटिंग त्रुटि जो भी हो, अगली बार ऐसा नहीं होना चाहिए।
गरीबों की आह नहीं दुआएं लें, मुख्य सचिव बन जाएंगे
नगर निगम बोर्ड बैठक की बैठक में घंटाघर के पार्षद जियाउल इस्लाम ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। बोले-गरीबों और जरूरतमंदों के साथ पुलिस और नगर निगम ज्यादती कर रही है। उन्हें मारा-पीटा जा रहा है। इनकी आह लेने से बचें। दुआएं लेंगे तो यहां से जाने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव भी बन सकते हैं। इस पर ठहाके लगे। जीआईएस सर्वे पर उन्होंने मेयर को घेरा। कहा-वार्ड संख्या 12 में निशा खातून के 350 वर्ग फीट में बने मकान पर जीआईएस सर्वे की नोटिस भेज दिया गया, जबकि 358 वर्ग फीट के बाद ही संपत्ति कर कर लागू होता है। ऐसे में मनमाने तरीके से निजी फर्म लोगों को डरा रही है, इसे बंद किया जाए।
सुंदरीकरण के चक्कर में नाम हटा दे रहे...ऐसा क्यों
सिविल लाइंस के पार्षद अजय राय ने नगर आयुक्त से सवाल किया कि स्व. कल्पनाथ राय के नाम पर विश्वविद्यालय चौराहा था, उस नाम को क्यों हटाया गया? नगर आयुक्त ने शहर के चौराहों से विज्ञापन और अन्य प्रचार-प्रसार से राजस्व का लाभ बताकर आंकड़े बताए। नगर निगम के आत्मनिर्भर बनने की बात कही। इस पर पार्षद ने पूछा कि चौराहों के सुंदरीकरण की फाइल को क्या बोर्ड या कार्यकारिणी में रखी गई थी।
नगर आयुक्त ने नगर निगम के हित का हवाला देते हुए बताया कि ये अधिकारी सभी पार्षदों और नगर आयुक्त का होता है, नगर निगम को बेहतर की तरफ ले जाएं। इसी के तहत किया गया। लेकिन, किसी चौराहे के नाम को नहीं बदला जाएगा। सुंदीकरण प्रचार- करने वालों को इसका ध्यान रखना होगा। सहमति के बाद पार्षद बैठ गए। वहीं, वार्ड नंबर 70 के पार्षद अजय ओझा ने कहा कि वे अपने मकान निर्माण के दौरान घर के सामने रखी गिट्टी रखवाए थे। नगर निगम ने गिट्टी उठवा लिए। अगले दिन जब नगर आयुक्त से इसे लेकर शिकायत की तो गिट्टी वापस की गई। सदन के पार्षद के साथ इस तरह का व्यवहार कितना ठीक है।
सुबह 11 बजे से शुरू हुई बैठक दोपहर तीन बजे तक चल रही थी। कुछ पार्षदों ने लंच की बात कही। इस पर कुछ पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि लंच के बाद बैठक को खत्म न कर दिया जाए। मेयर और नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि बैठक लंच के बाद भी चलेगी। सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके बाद सभी हंसते हुए सदन के बाहर आ गए।