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गोरखपुर परिषदीय स्कूल: कैसे हो पढ़ाई, जब हाथ में किताब ही नहीं आई
Fri, 11 Nov 2022 11:44 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 11 Nov 2022 11:44 AM IST
सार
बीएसए आरके सिंह ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में किताबों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। जैसे-जैसे शासन स्तर से खेप मिल रही है। उनका सत्यापन कराकर वितरण किया जा रहा है। माह के आखिर तक लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
परिषदीय स्कूलों में आधा से अधिक सत्र बीत चुका है, मगर अभी तक किताबों के शत प्रतिशत वितरण के लक्ष्य को विभाग हासिल नहीं कर सका है। बिना किताबों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पूरा का पूरा पाठ्यक्रम ही पिछड़ता जा रहा है। अध्यापक भी जैसे तैसे पुरानी किताबों के माध्यम से अध्यापन कार्य को पूरा कराने में लगे हैं।
जिले के 2514 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 3.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिन्हें, कक्षा एक से आठवीं तक की तकरीबन 25 लाख से अधिक किताबें शासन की ओर से निशुल्क वितरण की जाती हैं। मगर, सत्र 2022-23 में नवंबर तक महज 18,24,306 किताबों का ही वितरण किया जा सका है। जबकि, छह लाख से अधिक किताबों का वितरण किया जाना अभी भी शेष हैं। सबसे ज्यादा परेशानी इस बात है कि जो किताबें आईं हैं वो भी समस्त कक्षाओं और विषयों की नहीं हैं। विभाग का दावा है कि जैसे-जैसे किताबें आई हैं, उनका वितरण हो रहा है।
एक ट्रक और किताबें बुधवार को पहुंचीं
परिषदीय स्कूलों में वितरण के लिए एक ट्रक और किताबों की खेप बुधवार को आई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ट्रक के अंदर 1.10 लाख किताबें हैं। शेष किताबों के खेप को लेकर भी ट्रक जिले के लिए चले हैं। नवंबर तक किताबों के वितरण के लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
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डीबीटी का कार्य भी नहीं हुआ पूरा
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की ओर से स्कूल यूनिफार्म, स्कूल बैग, जूता मोजा, स्वेटर और स्टेशनरी के मद में 1,200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में भेजी जानी है। जनपद में नामांकित 3.50 लाख बच्चों के सापेक्ष अभी तक 2.80 लाख बच्चों को डीबीटी के तहत धनराशि भेजी गई है। शेष का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। धनराशि मिलते ही उसे भी पूरा कर लिया जाएगा।
बीएसए आरके सिंह ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में किताबों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। जैसे-जैसे शासन स्तर से खेप मिल रही है। उनका सत्यापन कराकर वितरण किया जा रहा है। माह के आखिर तक लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
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जिले के 2514 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 3.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिन्हें, कक्षा एक से आठवीं तक की तकरीबन 25 लाख से अधिक किताबें शासन की ओर से निशुल्क वितरण की जाती हैं। मगर, सत्र 2022-23 में नवंबर तक महज 18,24,306 किताबों का ही वितरण किया जा सका है। जबकि, छह लाख से अधिक किताबों का वितरण किया जाना अभी भी शेष हैं। सबसे ज्यादा परेशानी इस बात है कि जो किताबें आईं हैं वो भी समस्त कक्षाओं और विषयों की नहीं हैं। विभाग का दावा है कि जैसे-जैसे किताबें आई हैं, उनका वितरण हो रहा है।
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एक ट्रक और किताबें बुधवार को पहुंचीं
परिषदीय स्कूलों में वितरण के लिए एक ट्रक और किताबों की खेप बुधवार को आई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ट्रक के अंदर 1.10 लाख किताबें हैं। शेष किताबों के खेप को लेकर भी ट्रक जिले के लिए चले हैं। नवंबर तक किताबों के वितरण के लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
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डीबीटी का कार्य भी नहीं हुआ पूरा
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की ओर से स्कूल यूनिफार्म, स्कूल बैग, जूता मोजा, स्वेटर और स्टेशनरी के मद में 1,200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में भेजी जानी है। जनपद में नामांकित 3.50 लाख बच्चों के सापेक्ष अभी तक 2.80 लाख बच्चों को डीबीटी के तहत धनराशि भेजी गई है। शेष का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। धनराशि मिलते ही उसे भी पूरा कर लिया जाएगा।
बीएसए आरके सिंह ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में किताबों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। जैसे-जैसे शासन स्तर से खेप मिल रही है। उनका सत्यापन कराकर वितरण किया जा रहा है। माह के आखिर तक लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।