फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Corruption Case Registry Office in Gorakhpur

भ्रष्टाचार मामला रजिस्ट्री कार्यालय: नियुक्ति कहीं नहीं, दखल हर जगह कर रहे अधिकारी

Tue, 12 Apr 2022 01:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 12 Apr 2022 01:05 PM IST
सार

हर रजिस्ट्री कार्यालय में बिना वेतन, मानदेय के सरकारी कर्मी की तरह काम करते हैं कई लोग, स्पॉट निरीक्षण तक का काम करते हैं बिचौलिये, जिले की सभी तहसीलों में भी बोलबाला।

विज्ञापन
Corruption Case Registry Office in Gorakhpur
डीएम विजय किरन आनंद - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भ्रष्टाचार के मुकदमे में गिरफ्तार हुए विजय मिश्रा और अशोक उपाध्याय ही नहीं, बल्कि जिले की सभी तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में कई बिचौलिये सक्रिय रहते हैं, जो बिना स्थायी-अस्थायी नियुक्ति और मानदेय के काम करते हैं। इनकी दखल हर टेबल पर होती है। जमीनों के बैनामों में स्टांप कम तो नहीं जमा किया गया, इसके लिए स्पॉट निरीक्षण जैसी गंभीर प्रक्रिया भी ऐसे लोगों के जिम्मे है। कुछ तो ऐसे हैं जो अधिकारियों के घर सुबह-शाम खानसामे का काम करने के साथ दिन में रजिस्ट्री विभाग में सरकारी कर्मचारियों की तरह महत्वपूर्ण पटल के काम भी करते दिख जाते हैं।

विज्ञापन


विभाग में बिचौलियों की गहरी दखल पर नाम न छापने की शर्त पर रजिस्ट्री समेत कुछ अन्य विभागों के अधिकारियों की दलील है कि विभाग में कर्मचारियों की कमी है और काम अधिक है। इस संबंध में शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। जिले के आला अफसरों से भी समस्या साझा की गई है। हर उप निबंधक कार्यालय में रोजाना 100 से अधिक बैनामा होते हैं।
विज्ञापन


स्टांप, बैनामा करने वाले क्रेता, विक्रेता, गवाहों की जांच समेत कई तरह की प्रक्रिया होती है। ऐसे में कुछ कर्मचारी चाय-पानी के नाम पर विभाग में रखे जाते हैं। हालांकि, इनसे महत्वपूर्ण काम नहीं लिया जाता है। सभी की निगरानी होती है। बैनामा के कागजात, स्पॉट निरीक्षण जैसे सभी अहम काम उप निबंधक और विभाग के स्थायी कर्मचारी ही करते हैं। ऐसे लोगों का यह भी दावा है कि सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों के रजिस्ट्री कार्यालय में भी बिना किसी मानदेय के बाहरी लोगों से काम लेने की प्रक्रिया आम है। जांच हो तो सब साफ हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

भ्रष्टाचार उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले तहसील के कुछ अधिकारी भी शामिल

आरोप है कि डीएम के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय में भ्रष्टाचार को उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले तहसील के कुछ अधिकारी भी अपने कार्यालयों में बाहरी लोगों से काम लेते हैं। सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार कार्यालय के साथ ही कानूनगो, लेखपाल भी ऐसे लोगों से काम लेते हैं। हर लेखपाल के पास एक से दो मुंशी हैं, जो जाति, आय, निवास समेत सभी प्रमाण पत्रों और कई अन्य मामलों में रिपोर्ट लगाने से लेकर कई अन्य गोपनीय कार्य कर रहे हैं। दूसरे विभागों का भी ऐसा ही हाल है।

हालांकि, संसाधनों की आड़ में गलत को सही बताने की दलील पर डीएम विजय किरन आनंद का कहना है कि किसी भी विभाग में कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं कर सकता है। बैठकों में सभी को निर्देश दिए जाते हैं कि कार्य में यदि किसी तरह की दिक्कत आ रही है तो आला अफसरों से बताएं, उसे दूर कराया जाएगा। यदि कहीं पर बेवजह जनता को परेशान करने, उनसे सुविधा शुल्क आदि के नाम पर वसूली का मामला पकड़ में आया तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रजिस्ट्री विभाग के आला अफसरों पर भी उठ रहे सवाल

आरटीओ के साथ ही कलेक्ट्रेट मुख्यालय परिसर स्थित सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय में भ्रष्टाचार के संबंध में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के आला अफसरों पर भी सवाल उठने लगे हैं। उप निबंधक कार्यालय के ठीक ऊपर के तल पर डीआईजी स्टांप और एआईजी स्टांप का कार्यालय है। एक ही भवन में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा खेल सामने आने पर चर्चा आम है कि आला अफसर किस तरह की निगरानी कर रहे थे?

एआईजी स्टांप कमलेश शुक्ला का कहना है कि कार्रवाई होने तक उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि विभाग की नियमित समीक्षा के साथ औचक निरीक्षण किया जाता है। कार्यालय में अधिकारियों, कर्मचारियों, बैनामा कराने आने वाले क्रेता-विक्रेता, गवाह, डीड लेखक और अधिवक्ताओं के अलावा किसी बाहरी के दाखिल होने पर सख्ती है। किसी को भी गलत करने की छूट नहीं है। अब निगरानी और कड़ी कर दी जाएगी। कोई भी संदिग्ध मिला तो कार्रवाई की जाएगी।  

जमीन के भू-प्रयोग के खेल में भी हेरफेर

आवासीय जमीन की भू-प्रवृत्ति छिपाकर उसे कृषि बताकर भी स्टांप ड्यूटी में गोलमाल किया जाता है। कई जगह की कृषि जमीन के आसपास आबादी विकसित हो जाने से उस पर स्टांप ड्यूटी आवासीय के मुताबिक निर्धारित की जाती है। रजिस्ट्री विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों में भी लेनदेन कर जमीन की रजिस्ट्री, कृषि दिखाकर कर दी जाती है। जमीन पर पेड़ लगे होते हैं, तो भी स्टांप ड्यूटी अधिक लगती है। यदि कच्चा मकान या चहारदीवारी है, तो भी स्टांप ड्यूटी की राशि बदल जाती है। मगर सूचनाएं छिपाकर इसमें हेरफेर कर दिया जाता है। बैनामा हो चुकी जमीनों के निरीक्षण में भी सांठगांठ कर स्टांप ड्यूटी का खेल खेला जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed