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कोरोना से जंग: संतकबीरनगर में संक्रमितों के इलाज की लचर व्यवस्था से बिगड़ रहा माहौल, डीएम सख्त

Fri, 14 May 2021 02:07 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 14 May 2021 02:07 PM IST
सार

मरीजों की मौत पर बौखला रहे तीमारदार और कर रहे हंगामा। आठ महीने में सुधरी व्यवस्था पर पटरी पर लौटने में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी बनी बाधा।
 

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Corona infection treatment system poor in Sant Kabir Nagar
डीएम दिव्या मित्तल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की लचर व्यवस्था से तीमारदार परेशान हैं। इसके पीछे वजह डॉक्टर, स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वॉय की कमी तो है ही, साथ में ठीक प्रकार से मरीजों की देखभाल न होना भी तीमारदारों में असंतोष को जन्म दे रहा है। आए दिन अस्पताल में मरीजों की हो रहीं मौतों से तीमारदार बौखला कर हंगामा भी कर रहे हैं। वैसे व्यवस्था सुधार को लेकर डीएम दिव्या मित्तल काफी गंभीर दिख रही हैं।
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मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी। जब मरीज बढ़ने लगे तो उस दौरान पूर्व डीएम रवीश गुप्ता ने सेंट थॉमस स्कूल को एलवन अस्पताल बनवाया था। यहां बेड की जगह चारपाई पर मरीजों को लिटाकर उपचार किया जा रहा था। जबकि गंभीर मरीजों को यहां भर्ती करके उपचार किए जाने की सुविधाएं नहीं थीं। 
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ऐसी दशा में जिले से गंभीर मरीजों को बस्ती के कैली अस्पताल और मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया जाता था। सितंबर 2020 में डीएम दिव्या मित्तल की यहां तैनाती हुई। उसके बाद कोरोना संक्रमण को लेकर व्यवस्था सुधार की ओर पहल शुरू हुई। सबसे पहले संयुक्त जिला अस्पताल में कोरोना का एमसीएच विंग तैयार कराया गया। यहां ऑक्सीजन युक्त 150 बेड और 50 सामान्य बेड़ की व्यवस्था हुई। 
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मरीजों को बेड पर पाइप लाइन से ऑक्सीजन दिए जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कोरोना के दूसरे चरण में जब संक्रमित बढ़ने लगे और उन्हें ऑक्सजीन की जरूरत पड़ने लगी तो जिले में मगहर स्थित इकलौते मयूर ऑक्सीजन प्लांट को प्रशासन ने अपनी देखरेख में ले लिया। इसी गैस प्लांट के सहारे बस्ती मंडल के तीनों जनपदों को ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जा रही है। 

जरूरत 700 सिलिंडर की प्रतिदिन की है और उत्पादन सिर्फ 450 से 500 सिलिंडर की है। ऐसी दशा में गोरखपुर के डीएम से संपर्क करके अब तक सात गाड़ी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जा चुकी है। जबकि डीएम बस्ती की ओर से भी आंबेडकरनगर के टांडा से तीन गाड़ी एलएमओ की आपूर्ति कराई जा चुकी है। 

इन सब व्यवस्थाओं के बावजूद ऑक्सजीन की कमी हो जाती है। सबसे विकट समस्या है कि कोविड के एमसीएच विंग में जरूरत के हिसाब से डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय और सफाईकर्मी नहीं है। इससे मरीजों की समुचित देखभाल और सफाई व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पा रही है। बुधवार की रात एक महिला मरीज की मौत हो गई। 

तीमारदार अव्यवस्था से नाराज होकर हंगामा के साथ तोड़फोड़ करने लगे तो स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें खदेड़ कर गेट में ताला बंद कर दिया। बात डीएम तक पहुंची तो उनके निर्देश पर एसडीएम और सीओ पहुंच गए। काफी मान मनौव्वल के दो घंटे बाद गेट खुला और परिजनों को शव सुपुर्द किया गया। ऐसे हालात आगे उत्पन्न हो, इस दिशा में जिम्मेदारों को विशेष पहल करने की जरूरत है।

डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में 100-100 सिलिंडर के प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के दो ऑक्सीजन प्लांट बनवाएं जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक दोनों प्लांट चालू हो जाएंगे तो ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होगी। मेंहदावल विधायक की ओर से 50 लाख रुपये निधि से दी गई है। इससे मेंहदावल सीएचसी में ऑक्सीजन का प्लांट बनवाया जाएगा। जबकि गन्ना विभाग ने हैंसर सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट बनाने पर सहमति जता दी है। मेंहदावल सीएचसी और हैंसर सीएचसी को कोविड टू अस्पताल के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में व्यवस्थाएं तो हैं, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है। आउटसोर्सिंग से कोई डॉक्टर या अन्य स्वास्थ्य कर्मी कोविड अस्पताल में काम करने का तैयार नहीं है। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को दूर करने की कोशिश जारी है।
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