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गोरखपुर विश्वविद्यालय: विद्यार्थी की चुनौती पर कापियों का होगा पुनर्मूल्यांकन, विभागाध्यक्ष कराएंगे ये काम
Mon, 31 May 2021 01:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 31 May 2021 01:16 PM IST
सार
विश्वविद्यालय में मूल्यांकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने लिए विद्यार्थियों को मिलेगी सुविधा। विद्या परिषद से मिल चुकी है व्यवस्था को मंजूरी, तैयार किया जा रहा है प्रारूप।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी कापियों का पुनर्मूल्यांकन करा सकेंगे। आनलाइन मूल्यांकन के तहत जांची गई कापी में मिले नंबर से संतुष्ट नहीं हैं तो पुनर्मूल्यांकन का मौका मिलेगा। मूल्यांकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। विद्या परिषद से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
इस वर्ष विश्वविद्यालय ने कापियों के आनलाइन मूल्यांकन की व्यवस्था बनाई है। पायलट प्रोजेक्ट तहत सेमेस्टर सिस्टम वाले पाठ्यक्रम की कापियों का मूल्यांकन चल रहा है। करीब छह हजार कापियां जांचीं जा चुकीं हैं। भविष्य में स्नातक कक्षाओं की कापियों के आनलाइन मूल्यांकन की भी तैयारी है। अगर विद्यार्थी को अपनी कांपी में मिले नंबरों को देखकर संतुष्टि नहीं होती है तो वह उस मूल्यांकन को चुनौती दे सकेगा। इसके के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा और उसके लिए निर्धारित फीस भी जमा करनी होगी।
विभागाध्यक्ष कराएंगे पुनर्मूल्यांकन
पुनर्मूल्यांकन कराने की जिम्मेदारी संबंधित विषय के विभागाध्यक्ष की होगी। वह परीक्षा विभाग से समन्वय बनाकर एक पैनल बनाएंगे, जो कापी में नंबरों को लेकर चुनौती की पड़ताल करेगा। यदि विद्यार्थी द्वारा दी गई चुनौती सही साबित हुई तो उसकी कापी फिर से जांची जाएगी और पुनर्मूल्यांकन के बाद जो नंबर आएगा उसे मार्कशीट में चढ़ाया जाएगा। यदि चुनौती गलत हुई तो उसे अपने मूल्यांकन से ही संतुष्ट होना ही पड़ेगा। यही नहीं चुनौती सही साबित होती है तो पुनर्मूल्यांकन के लिए जमा गई फीस उसे वापस कर दी जाएगी।
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इस वर्ष विश्वविद्यालय ने कापियों के आनलाइन मूल्यांकन की व्यवस्था बनाई है। पायलट प्रोजेक्ट तहत सेमेस्टर सिस्टम वाले पाठ्यक्रम की कापियों का मूल्यांकन चल रहा है। करीब छह हजार कापियां जांचीं जा चुकीं हैं। भविष्य में स्नातक कक्षाओं की कापियों के आनलाइन मूल्यांकन की भी तैयारी है। अगर विद्यार्थी को अपनी कांपी में मिले नंबरों को देखकर संतुष्टि नहीं होती है तो वह उस मूल्यांकन को चुनौती दे सकेगा। इसके के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा और उसके लिए निर्धारित फीस भी जमा करनी होगी।
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विभागाध्यक्ष कराएंगे पुनर्मूल्यांकन
पुनर्मूल्यांकन कराने की जिम्मेदारी संबंधित विषय के विभागाध्यक्ष की होगी। वह परीक्षा विभाग से समन्वय बनाकर एक पैनल बनाएंगे, जो कापी में नंबरों को लेकर चुनौती की पड़ताल करेगा। यदि विद्यार्थी द्वारा दी गई चुनौती सही साबित हुई तो उसकी कापी फिर से जांची जाएगी और पुनर्मूल्यांकन के बाद जो नंबर आएगा उसे मार्कशीट में चढ़ाया जाएगा। यदि चुनौती गलत हुई तो उसे अपने मूल्यांकन से ही संतुष्ट होना ही पड़ेगा। यही नहीं चुनौती सही साबित होती है तो पुनर्मूल्यांकन के लिए जमा गई फीस उसे वापस कर दी जाएगी।
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शिक्षक पर भी कार्रवाई का है प्रावधान
इस नई व्यवस्था में शिक्षक पर कार्रवाई का प्रावधान है। पुनर्मूल्यांकन में यदि पैनल यह पाता है किसी शिक्षक ने द्वेषवश किसी छात्र के नंबर कम किए हैं तो इसे लेकर उसका पुराना रिकार्ड देखा जाएगा। शिक्षक के खिलाफ इसे लेकर तीन या उससे अधिक बार शिकायत मिलने पर उसे परीक्षक पैनल से बाहर किया जाएगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया के विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली के साथ मूल्यांकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की पूरी कोशिश की गई है। विश्वविद्यालय की मंशा है कि मूल्यांकन को लेकर शिक्षक और विद्यार्थी दोनों संतुष्ट रहें। आनलाइन मूल्यांकन में ऐसा किया जाना आसानी से संभव है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया के विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली के साथ मूल्यांकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की पूरी कोशिश की गई है। विश्वविद्यालय की मंशा है कि मूल्यांकन को लेकर शिक्षक और विद्यार्थी दोनों संतुष्ट रहें। आनलाइन मूल्यांकन में ऐसा किया जाना आसानी से संभव है।