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गोरखपुर: बिजली निगम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे उपभोक्ता, गलत बिल बना परेशानी का सबब

Sat, 10 Sep 2022 02:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 10 Sep 2022 02:35 PM IST
सार

 फर्म के कर्मचारी गलत बिल या लंबे समय से उपभोक्ताओं को ही बिल ही नहीं दे रहे हैं, इससे उपभोक्ताओं को बिजली की ज्यादा रकम और ब्याज भी भुगतान करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले सहारा इस्टेट और बक्शीपुर खंड में ऐसे मामले सामने आए थे।

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Consumers facing brunt of negligence of electricity corporation
बिजली का बिल। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बिजली निगम की बिलिंग कंपनी की लापरवाही की खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। फर्म के कर्मचारी गलत बिल या लंबे समय से उपभोक्ताओं को ही बिल ही नहीं दे रहे हैं, इससे उपभोक्ताओं को बिजली की ज्यादा रकम और ब्याज भी भुगतान करना पड़ रहा है।
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कुछ दिन पहले सहारा इस्टेट और बक्शीपुर खंड में ऐसे मामले सामने आए थे। इस पर बिजली निगम की टीम ने जांच करवाई और दो मीटर रीडरों की समस्या का समाधान किया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर रीडर पांच से छह महीने बीत जाने के बाद भी बिल नहीं बनाने पहुंचते हैं।
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उपभोक्ता जब निगम के दफ्तर जाकर बिल नहीं मिलने की शिकायत करते हैं तो उन्हें मीटर रीडिंग का वीडियो बनाकर लाने को कहा जाता है। वीडियो नहीं बनाकर लाने से बिल जमा होने के बावजूद दोबारा कई गुना अधिक बिल थमाने के मामले सामने आए हैं।
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वहीं, अधिकारी से सामान्य मामला बताते हैं। अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि इन दिनों मीटर एजेंसी की लापरवाही से बिलिंग में गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। निगम ने अपने स्तर से भी जांच करवाई थी। दोषी मिलने पर दो बिलिंग कंपनियों के कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई थी।

केस 1
तारामंडल के विनोद का बिजली का बिल मई माह के बाद से नहीं बनाया गया था। तीन दिन पहले मीटर रीडर ने 36 हजार रुपये का बिजली बिल बनाया है। इस पर ब्याज का अधिभार भी है। अब वह पार्ट पेमेंट से भुगतान करने के साथ ब्याज में माफी के लिए दौड़ लगा रहे हैं।


केस 2
बक्शीपुर के अंकित तिवारी के यहां भी जुलाई माह के बाद से मीटर रीडर नहीं गया था। दो दिन पहले बिजली खंड के दफ्तर पहुंचकर उन्होंने बिल निकलवाया तो 23 हजार रुपये देखकर सन्न रह गए। अब एक साथ इतनी बड़ी रकम कैसे देंगे, इसे लेकर वह परेशान हैं।
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