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Gorakhpur News: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राधाकृष्ण की पूजा अर्चना, उमड़े श्रद्धालु
Sat, 18 Jul 2026 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 18 Jul 2026 02:43 AM IST
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-गीतावाटिका के 41वें स्थापना दिवस का समापन
-रामचरितमानस कथा में परशुराम-लक्ष्मण संवाद
गोरखपुर। गीतावाटिका स्थित राधाकृष्ण साधना मंदिर में आयोजित 41वें स्थापना दिवस का शुक्रवार को वैदिक परंपराओं और भक्तिभाव के साथ समापन हो गया। समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार व शास्त्रोक्त विधि-विधान से राधाकृष्ण की पूजा-अर्चना की गयी।
श्रद्धालुओं ने युगल सरकार के चरणों में पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड भक्ति, आध्यात्मिक उन्नति और विश्वकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर दिनभर हरिनाम संकीर्तन और जयघोषों से गूंजता रहा।
रामचरितमानस कथा में वृंदावन के संत हरिकृष्ण दास ने सीता स्वयंवर, शिवधनुष भंग तथा भगवान परशुराम और लक्ष्मण संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और आदर्श आचरण का प्रतीक है। रामचरितमानस से हमे शिक्षा मिलती है कि क्रोध का समाधान संयम, मधुरता और विनम्र व्यवहार से ही संभव है। कथा के बाद मंदिर में विराजमान समस्त विग्रहों का विधिवत पूजन, आरती और वंदन किया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय 41वें स्थापना दिवस समारोह का विधिवत समापन हुआ।
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-रामचरितमानस कथा में परशुराम-लक्ष्मण संवाद
गोरखपुर। गीतावाटिका स्थित राधाकृष्ण साधना मंदिर में आयोजित 41वें स्थापना दिवस का शुक्रवार को वैदिक परंपराओं और भक्तिभाव के साथ समापन हो गया। समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार व शास्त्रोक्त विधि-विधान से राधाकृष्ण की पूजा-अर्चना की गयी।
श्रद्धालुओं ने युगल सरकार के चरणों में पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड भक्ति, आध्यात्मिक उन्नति और विश्वकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर दिनभर हरिनाम संकीर्तन और जयघोषों से गूंजता रहा।
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रामचरितमानस कथा में वृंदावन के संत हरिकृष्ण दास ने सीता स्वयंवर, शिवधनुष भंग तथा भगवान परशुराम और लक्ष्मण संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और आदर्श आचरण का प्रतीक है। रामचरितमानस से हमे शिक्षा मिलती है कि क्रोध का समाधान संयम, मधुरता और विनम्र व्यवहार से ही संभव है। कथा के बाद मंदिर में विराजमान समस्त विग्रहों का विधिवत पूजन, आरती और वंदन किया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय 41वें स्थापना दिवस समारोह का विधिवत समापन हुआ।
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