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Gorakhpur: महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध किए जाएंगे प्रदेश भर के कॉलेज, वेबसाइट पर दर्ज किया जाएगा कॉलेजों का विवरण
Fri, 03 Jun 2022 04:35 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 03 Jun 2022 04:35 PM IST
सार
कुलपति ने बताया कि नए कॉलेजों को खोलने के लिए एक लाख रुपये का शुल्क तय किया गया है। अनुमति मिलने के बाद इन नए कॉलेजों को अगले साल शुल्क के तौर पर 50 हजार रुपये देने होंगे।
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आयुष विश्वविद्यालय का (ले आउट) और गोरखनाथ विश्वविद्यालय।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए प्रदेश के भर के 107 कॉलेज, चार जून से आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आयुष विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। कॉलेज चार जून से विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर संपूर्ण जानकारी दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए कॉलेजों को कोड, लॉग-इन आईडी और पासवर्ड विश्वविद्यालय ने भेज दिए हैं।
कुलपति प्रो. एके सिंह ने बताया कि निजी और राजकीय कॉलेजों के लिए अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं। निजी कॉलेजों में 100 सीटों पर 1.50 लाख और 60 सीटों पर 1.30 लाख रुपये तय किए गए हैं। जबकि, राजकीय कॉलेजों में 100 सीटों पर 40 हजार और 60 सीटों पर 30 हजार की राशि तय की गई है। निजी कॉलेजों से स्नातकोत्तर के प्रति छात्रों के हिसाब से पांच हजार और राजकीय कॉलेजों के छात्रों से दो हजार रुपये लिए जाएंगे। इसके अलावा सभी कॉलेजों को 18 प्रतिशत जीएसटी भी देनी होगी।
उन्होंने बताया कि राजकीय के लिए 30 से 40 हजार रुपये शुल्क तय किए गए हैं। इसे कार्यपरिषद की बैठक के बाद घटाया और बढ़ाया भी जा सकता है। यदि परिषद शुल्क कम कर देगा तो विश्वविद्यालय उन बचे रुपये को कॉलेजों को वापस कर देगा।
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कुलपति प्रो. एके सिंह ने बताया कि निजी और राजकीय कॉलेजों के लिए अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं। निजी कॉलेजों में 100 सीटों पर 1.50 लाख और 60 सीटों पर 1.30 लाख रुपये तय किए गए हैं। जबकि, राजकीय कॉलेजों में 100 सीटों पर 40 हजार और 60 सीटों पर 30 हजार की राशि तय की गई है। निजी कॉलेजों से स्नातकोत्तर के प्रति छात्रों के हिसाब से पांच हजार और राजकीय कॉलेजों के छात्रों से दो हजार रुपये लिए जाएंगे। इसके अलावा सभी कॉलेजों को 18 प्रतिशत जीएसटी भी देनी होगी।
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उन्होंने बताया कि राजकीय के लिए 30 से 40 हजार रुपये शुल्क तय किए गए हैं। इसे कार्यपरिषद की बैठक के बाद घटाया और बढ़ाया भी जा सकता है। यदि परिषद शुल्क कम कर देगा तो विश्वविद्यालय उन बचे रुपये को कॉलेजों को वापस कर देगा।
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