कोरोना: 50 से अधिक बूथों पर बच्चे लगवा सकेंगे टीका, 12 से 14 वर्ष के बच्चों के वैक्सीनेशन पर विभाग का है जोर
सीएमओ ने बताया कि 12 से 14 वर्ष के बच्चों की सबसे अधिक संख्या स्कूलों में हैं। इसे देखते हुए एक बार फिर स्कूलों को पत्र लिखा जाएगा, जिससे की टीकाकरण की गति में तेजी आ सके।
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देश के कई राज्यों और प्रदेश के कई जिलों में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 12 से 14 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण की तैयारी तेज कर दी है। अब हर दिन 50 से अधिक बूथ बच्चों के टीकाकरण के लिए बनाए जाएंगे। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बच्चे टीका लगवा सकेंगे। इन केंद्रों पर बच्चों को लगने वाली कॉर्बेवैक्स वैक्सीन भेजी जाएगी। जबकि, अब तक शहर के केवल छह बूथों पर ही बच्चों को टीका लगता था।
जानकारी के मुताबिक, जिले में 12 से 14 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार बेहद धीमी है। एक लाख 88 हजार बच्चों के सापेक्ष अब तक 36 हजार को ही टीका लगाया गया है। जबकि, इस लक्ष्य को मई में ही पूरा करना था। इसे देखते हुए विभाग अब टीकाकरण के लिए बूथों की संख्या बढ़ाएगा। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के बूथों पर बच्चों को लगने वाली वैक्सीन कॉर्बेवैक्स भेजी जाएगी, जिससे बच्चों के टीकाकरण में तेजी आ सके।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि शहरी और ग्रामीण इलाके के हर पीएचसी और सीएचसी पर बच्चों को टीका लगाया जाएगा। जिला अस्पताल के एमआरआई सेंटर पर बने बूथ पर बच्चों के टीकाकरण की शुरुआत की जा चुकी है। इन बूथों पर किशोर, युवा और बुजुर्ग भी पहुंचकर टीका लगवा सकते हैं। इन बूथों पर कोवैक्सीन, कोविशील्ड और कॉर्बेवैक्स वैक्सीन भेजी जा रही है।
इन बूथों पर बच्चों को लगवा सकेंगे टीका
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के टीकाकरण के लिए शहरी क्षेत्र में अधिक बूथ बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिला अस्पताल के एमआरई बिल्डिंग, पीएचसी शाहपुर, झरना टोला, जंगल कौड़िया के रामघाट, छोटे काजीपुर, नथमलपुर, शाहपुर, शिवपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जटेपुर, बेतियाहाता, तुर्कमानपुर, नगरीय स्वास्थ्य केंद्र रामगढ़ताल पर अभिभावक बच्चों को ले जाकर टीका लगवा सकते हैं।
स्कूलों को लिखा जाएगा पत्र
सीएमओ ने बताया कि 12 से 14 वर्ष के बच्चों की सबसे अधिक संख्या स्कूलों में हैं। इसे देखते हुए एक बार फिर स्कूलों को पत्र लिखा जाएगा, जिससे की टीकाकरण की गति में तेजी आ सके।