{"_id":"60eab28e8ebc3ed846536d8f","slug":"chaturmas-2021-lord-vishnu-will-rest-for-118-days-chaturmas-rule-importance-date","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chaturmas 2021: 118 दिन विश्राम करेंगे भगवान विष्णु, देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chaturmas 2021: 118 दिन विश्राम करेंगे भगवान विष्णु, देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास
Sun, 11 Jul 2021 02:27 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 11 Jul 2021 02:27 PM IST
सार
20 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, 15 नवंबर, देवउठनी एकादशी को समाप्त होगा। इस दौरान भगवान विष्णु की जगह भगवान शिव बनेंगे पालनहार।
विज्ञापन
देवशयनी एकादशी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इस वर्ष चातुर्मास (चातुर्मास्य) 20 जुलाई से देवशयनी एकादशी से शुरू होगा। इसका समापन 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ होगा। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस दौरान 118 दिन भगवान विष्णु विश्राम करेंगे। उनके स्थान पर भगवान शिव सृष्टि के पालनहार बनेंगे। चातुर्मास में सभी शुभ कार्य निषेध होते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाती है।
पंडित डॉ. जोखन पांडेय के मुताबिक, चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होते हैं।
चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्व भी
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि, चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।
विज्ञापन
नहीं होते हैं ये शुभ कार्य
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इन चारों महीनों में विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन, विवाह आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त नूतन गृहप्रवेश विशिष्ट यज्ञों का आरंभ इत्यादि भी कार्य निषेध हैं। लेकिन, नित्योपयोगी समस्त अर्चन संबंधी कार्य किए जाते है। ये चार महीने स्वाध्याय, मनन, चिंतन और आत्मावलोकन का समय है।
विज्ञापन
पंडित डॉ. जोखन पांडेय के मुताबिक, चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होते हैं।
विज्ञापन
चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्व भी
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि, चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।
विज्ञापन
नहीं होते हैं ये शुभ कार्य
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इन चारों महीनों में विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन, विवाह आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त नूतन गृहप्रवेश विशिष्ट यज्ञों का आरंभ इत्यादि भी कार्य निषेध हैं। लेकिन, नित्योपयोगी समस्त अर्चन संबंधी कार्य किए जाते है। ये चार महीने स्वाध्याय, मनन, चिंतन और आत्मावलोकन का समय है।