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यहां खिलाड़ियों की जिंदगी संवार रहे चंद्रभूषण, पेंशन की रकम से बनाया अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

Wed, 11 Nov 2020 05:50 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 11 Nov 2020 05:50 PM IST
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Chandra Bhushan Pandey make international player by pension money
बच्चों के साथ सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।

खेल से जुड़ाव के जोश में सेवानिवृत्त खेल शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय क्षेत्र के खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहे हैं। खुद की रकम खर्च कर और अभ्यास कराकर उन्होंने राजगीर की बेटी को मुकाम तक पहुंचाया। गरीब बेटी पोल वॉल्ट की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तो बनी ही, साथ में खेल कोटे से ही सीआरपीएफ में नौकरी भी हासिल की।

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सेवानिवृत्त होने के बाद चंद्रभूषण पांडेय खुद की जमीन में खेल का मैदान बनाकर सुबह और शाम खिलाड़ियों को अभ्यास तो कराते ही हैं, साथ में पेंशन की रकम से खिलाड़ियों के संसाधनों और जरूरतों को पूरी करने के लिए प्रत्येक महीने में सात हजार रुपये खर्च भी करते हैं। इनके इस कार्य की क्षेत्र में चहुंओर प्रशंसा हो रही है।
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महुली क्षेत्र के केटवली गांव निवासी 73 वर्षीय चंद्रभूषण पांडेय ने 23 वर्ष की उम्र में किसान इंटर कॉलेज सिक्टहा में खेल शिक्षक के पद पर नौकरी हासिल कर ली थी। शुरू से खेल के प्रति जुड़ाव होने की वजह से प्रतिभाओं का सम्मान करते हैं।
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परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं है अच्छी

क्षेत्र के रामपुर की रहने वाली पोल वॉल्ट की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संगीता चौधरी बताती हैं कि जब वह कक्षा आठवीं में पढ़ती थीं, तभी उनका संपर्क खेल शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय से हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं थी, लेकिन उनके अंदर खेलने का जुनून था। खेल शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने उन्हें अभ्यास कराने के साथ सुविधाएं और जरूरत पर रकम भी दी। इसका नतीजा रहा कि वह पोल वॅाल्ट की अंतरराष्ट्रीय खेलों में कई स्वर्ण पदक जीत सकीं। इसके साथ ही खेल कोटे से सीआरपीएफ में नौकरी भी हासिल की।

धपोखरा की रहने वाली बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा और खिलाड़ी पिंकी चौहान बताती हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन खेल में उनकी रुचि है। सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय उन्हें अभ्यास कराते हैं और जरूरत के संसाधनों पर रकम भी खर्च करते हैं।

उनकी देखरेख में खेलते हुए कानपुर में ओपेन गेम में पिछले वर्ष तिकड़ी कूद में प्रदेश में उन्हें तीसरा स्थान मिला था। केवटली गांव निवासी पूनम बताती हैं कि हाई जंप में वह मंडलीय खेल में प्रतिभाग कर चुकी हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय अभ्यास कराने के साथ संसाधन भी मुहैया कराने में पीछे नहीं हटते हैं।

 

प्रतिभाओं की सफलता से बढ़ा अभ्यास कराने का जुनून

सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय बताते हैं कि उनका शुरू से ही खेल से लगाव है। उनका सोच है कि वह पैसे कमा कर कोई उतना नाम नहीं कर सकते, जितना किसी गरीब का भविष्य संवार कर सकते हैं। उन्होंने नौकरी में रहने के दौरान भी काम किया। उनके कई प्रतिभावान शिष्यों ने राज्यस्तरीय खेलों में और कुछ अंतरराष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल जीतकर उनके हौसले को आगे बढ़ाया है।

वर्ष 2009-10 में सेवानिवृत्त हुए और तभी से प्रतिभाओं को खुद की जमीन में खेल का मैैदान बना कर अभ्यास कराते हैं। कूद, दौड़, डिस्कस, जेवलिंग आदि का अभ्यास कराते हैं। उन्हें प्रति महीने 35000 रुपये पेंशन मिलती है। दो बेटियां थीं, जिनकी उन्होंने शादी कर दी है।

इकलौता बेटा पवन पांडेय है। इसीलिए पेंशन की रकम से प्रति महीने खिलाड़ियों के लिए संसाधनों पर छह से सात हजार खर्च कर देते हैं। उनका ख्वाब है कि खेल की बदौलत प्रतिभाएं आगे निकलें और अपना भविष्य संवारें। इससे परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम रोशन होगा।
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