सीबीआई टीम का छापा: बीएसएनएल दफ्तर में अफरातफरी, अफसर खामोश
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ से आई टीम में सीबीआई के आठ सदस्य हैं। सुबह से ही बीएसएनएल कार्यालय में डेरा डाले हैं। कार्यालय का मुख्य द्वार अंदर से बंद करके जांच की जा रही है। आरोपित एजीएम से पूछताछ की जा रही है। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इससे पहले सुबह छापे के दौरान गोरखपुर पुलिस की मदद ली गई।
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गोरखपुर के शास्त्री चौक स्थित बीएसएनएल कार्यालय में सीबीआई के छापे से हड़कंप मच गया। अधिकारी और कर्मचारी सहमे रहे। कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं, कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि सीबीआई के रडार पर कई अधिकारी और कर्मचारी हैं।
जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा की टीम सोमवार सुबह बीएसएनएल कार्यालय पहुंच गई। टीम सबसे पहले महाप्रबंधक के पास गई और जरूरी जानकारी ली। जरूरी साक्ष्यों के साथ आई टीम ने आरोपित एजीएम व अन्य अफसरों को बुलाकर सवाल पूछे। साथ ही जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए।
सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में एजीएम से पूछताछ की जा रही है।
सुरक्षा में गए पुलिस वालों ने जैसे ही बताया कि सीबीआई की टीम लखनऊ से आई है, कर्मचारी अपनी-अपनी जगह बैठ गए और दूरी से बात करते नजर आए। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कुछ दिन पहले सीबीआई की टीम आई थी। टीम के सदस्यों ने एजीएम से मुलाकात की थी।
अनुमान था कि जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। अब अमल हो गया। बताया जा रहा है कि जो लोग पहले आए थे, वह एजीएम सेल्स से सीधे मिले थे और आधे घंटे तक बातचीत करके चले गए थे। शाम होने के बाद भी तमाम कर्मचारी रोज की तरह कार्यालय बंद करके घर नहीं गए थे, बल्कि कार्यालय के आसपास मंडराते दिखे।
पहले भी आ चुकी है सीबीआई
बीएसएनएल दफ्तर में पहले भी सीबीआई टीम जांच के लिए आ चुकी है। मामला इंटरनेशनल कॉलिंग के जरिये राजस्व क्षति का था। इस मामले में भी कई अफसरों की गर्दन फंसी थी। बताया जा रहा है कि इस मामले की भी जांच जारी है।
दुर्गेश प्रताप सिंह ने की है रिश्वत मांगने की शिकायत
शहर के आजाद नगर के दुर्गेश प्रताप सिंह ने सीबीआई से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि सैप आईटी सॉल्यूशन में काम करते हैं। यही फर्म बीएसएनएल की अलग-अलग परियोजनाओं में काम करती है। फर्म के प्रोपराइटर सुनील कुमार हैं। लेकिन, इस फर्म का सारा कामकाज गोरखपुर से होता है। फरवरी से अभी तक फर्म का कुछ भुगतान फंसा था। पूछे जाने पर कमीशन की बात पता चली।
13 अप्रैल को बीएसएनएल दफ्तर में एजीएम के पास गया, तो वो कमीशन मांगने लगे। एजीएम ने प्रतिमाह बीएसएनएल की तरफ से कुल भुगतान पर 10 फीसदी कमीशन की मांग रखी। इसके बाद दुर्गेश ने फरवरी के 47,470 रुपये और पिछले बचे 1,19,850 रुपये के भुगतान का पत्र भेज दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा, मामले की शिकायत सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा से कर दी।
शिकायतकर्ता दुर्गेश प्रताप सिंह ने कहा कि फर्म ने काम कराया, लेकिन भुगतान नहीं दिया। एजीएम ने कमीशन मांगा। इसके प्रमाण हैं। मामला सीबीआई के संज्ञान में है। सीबीआई एजीएम को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। छापा मारने वाली टीम ने मुझे सुबह ही बुलाया था।
सीबीआई के आठ सदस्य कर रहे हैं जांच
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ से आई टीम में सीबीआई के आठ सदस्य हैं। सुबह से ही बीएसएनएल कार्यालय में डेरा डाले हैं। कार्यालय का मुख्य द्वार अंदर से बंद करके जांच की जा रही है। आरोपित एजीएम से पूछताछ की जा रही है। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इससे पहले सुबह छापे के दौरान गोरखपुर पुलिस की मदद ली गई। बीएसएनएल कार्यालय के आसपास सुरक्षा के सख्त इंतजाम रहे। कार्यालय आने वाले ज्यादातर लोगों को वापस कर दिया गया।