UP Election 2022: विधानसभा चुनाव में ध्वस्त हो गए थे जातीय समीकरण, सुरक्षित सीटों पर भी खिला कमल
गोरखपुर-बस्ती मंडल की अनुसूचित बहुल सभी आठ सीटों पर भाजपा व उसके सहयोगी दलों को जीत मिली थी। बसपा-सपा को दूसरे या फिर तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था।
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पिछले विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण ध्वस्त हो गए थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की सभी आठ अनुसूचित जाति बहुल सीटों पर भाजपा व उसके सहयोगी दलों को जीत मिली थी।
सात विधानसभा क्षेत्रों में पहली बार एक साथ कमल खिला था। एक सीट भाजपा की सहयोगी सुभासपा के खाते में गई थी। बसपा और सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशियों को दूसरे या फिर तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। अनुसूचित जाति बहुल सीटों पर हार से बसपा के सारे समीकरण ध्वस्त हो गए थे।
इसी का नतीजा रहा कि पार्टी ने 2019 का लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में भी बसपा को कोई खास सफलता नहीं मिल सकी थी। बांसगांव (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र से भाजपा को बड़ी जीत मिली थी।
भाजपा को मिले थे 40.73 फीसदी वोट
गोरखपुर की बांसगांव (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा के डॉ. विमलेश पासवान विधायक चुने गए। डॉ. विमलेश को 71,966 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 40.73 फीसदी था। बसपा प्रत्याशी को करीब 13 फीसदी कम वोट मिले थे। सपा व कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी को तीसरा स्थान मिला था।
38.2 फीसदी मत पाकर जीती थी पार्टी
गोरखपुर की खजनी (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भी भाजपा को जीत मिली थी। संत प्रसाद 20 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे। भाजपा को 71,492 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 38.2 फीसदी था। इस सीट पर भी बसपा दूसरे स्थान पर थी। भाजपा के मुकाबले बसपा को करीब 10 फीसदी कम वोट मिले थे। सपा-कांग्रेस का संयुक्त प्रत्याशी तीसरे स्थान पर था।
महराजगंज सदर से मिली थी बड़ी जीत
महराजगंज के सदर (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के जयमंगल कन्नौजिया चुनाव मैदान में उतरे थे। उनको 1,25,154 मत मिले थे। बसपा प्रत्याशी निर्मेश मंगल 56,793 वोट ही पा सके थे। भाजपा को 68,361 वोटों के अंतर से बड़ी जीत मिली थी। कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी आलोक प्रसाद को 50,217 वोट मिले थे।
भाजपा ने जीता था चुनाव
बस्ती की महादेवा (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा के रवि सोनकर चुनाव जीते थे। भाजपा को 82,429 वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी दूधराम को 56,545 वोट मिले थे। सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी रामकरन आर्य को तीसरा स्थान मिला था। उन्हें 47,914 वोट मिले थे।
सुभासपा के खाते में गई थी सीट
कुशीनगर की रामकोला (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के रामानन्द बौद्ध विधायक चुने गए थे। सुभासपा को 1,02,782 वोट मिले थे। सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी पूर्णमासी देहाती 47,053 वोट पा सके थे। अनुसूचित जाति बहुल सीट पर बसपा के प्रत्याशी को तीसरा स्थान मिला था।
सलेमपुर में भी मिली थी जीत
देवरिया की सलेमपुर (सुरक्षित) विधानसभा से भाजपा के काली प्रसाद चुनाव जीते थे। भाजपा को 76,175 वोट मिले थे। अनुसूचित जाति बहुल सीट से सपा-कांग्रेस की संयुक्त प्रत्याशी विजयलक्ष्मी को 50,521 वोट मिले थे। बसपा प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था।धनघटा के विधायक योगी सरकार में बने मंत्री
संतकबीरनगर की धनघटा (सुरक्षित) सीट से भाजपा के श्रीराम चौहान 79,572 वोट पाकर विधायक बने थे, जो योगी सरकार में मंत्री भी हैं। इस बार धनघटा से भाजपा ने प्रत्याशी बदल दिया है। श्रीराम को गोरखपुर की सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है। सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी अलगू प्रसाद चौहान को 62,663 वोट मिले थे। बसपा के नीलमणि 51,938 वोट पा सके थे।भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा का मुख्य एजेंडा विकास व जनकल्याण है। अनुसूचित जाति के हर जरूरतमंद को पक्का मकान मिला है। इज्जतघर बना है। पिछले दो वर्षों से निशुल्क राशन दिया जा रहा है। श्रमिक कल्याण निधि, किसान सम्मान निधि से सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है। पहला मौका था, जब परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी छात्रों के परिजनों के बैंक खातों में ड्रेस, जूते व स्वेटर का पैसा भेजा गया। हर जरूरतमंद को सीधे लाभ पहुंचाया जा रहा है। जनता-जनार्दन खुश है। भाजपा को आशीर्वाद मिलता रहेगा।