गोरखपुर: राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज पर जालसाजी का केस, दो महीने से अधिक समय से फरार है संचालक
तहसीलदार सदर ने पिपराइच थाने में दर्ज कराया मुकदमा, छात्रों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर फर्जी मान्यता और वसूली की शिकायत की थी।
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राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज पर जालसाजी कर छात्रों से अधिक फीस वसूलने और फर्जी मान्यता पर प्रवेश लेने के मामले में बृहस्पतिवार को पिपराइच पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। तहसीलदार सदर की तहरीर पर पिपराइच थाने में जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, छल करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, तहसीलदार वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने तहरीर में लिखा है कि पैरामेडिकल कॉलेज के छात्रों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2018-19 एएनएम, जीएनएम वर्ष 2019-20 में एएनएम, जीएनएम और सत्र 2020-21 व 2021-22 में प्रवेश के लिए डोनेशन एवं निर्धारित से अधिक फीस ले ली गई है। इसके बाद न परीक्षा कराई गई और न ही डिग्री दी गई।
प्रथम सत्र के विद्यार्थियों को यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताकर नामांकन कराया गया और बाद में स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताया जा रहा है। बाद में पता चला की संस्था की मान्यता नहीं है। कूटरचित दस्तावेज के आधार पर मान्यता ली गई है। सीएमओ की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई थी। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
दो महीने से अधिक समय से फरार है अभिषेक
राज नर्सिंग पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक डॉ. अभिषेक यादव पर आठ जनवरी को कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया था। तभी से वह फरार चल रहा है। शासन के संयुक्त सचिव अनिल सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने भी केस दर्ज किया था। आरोप है कि मान्यता बहाल किए जाने के संबंध में शासन का फर्जी पत्र दिखाकर आरोपी ने उसी आधार पर छात्रों का प्रवेश लिया है।
शिकायत पर छानबीन में पता चला कि शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। दर्ज केस में एसएसपी ने प्रगति रिपोर्ट तलब की थी तो पुलिस सक्रिय हुई थी, लेकिन एक बार फिर पुलिस सुस्त पड़ गई है। आरोपित अब भी फरार है।