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खुशखबर: अब गोरखपुर में कैंसर का इलाज हुआ आसान, लगाई गई 18 करोड़ की मशीन

Wed, 23 Jun 2021 04:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 23 Jun 2021 04:19 PM IST
सार

ड्यूल एनर्जी लीनियर ट्रूबीम वेरियन एक्सीलरेटर से होगा कैंसर मरीजों का उपचार, हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर हॉस्पिटल को मिली 18 करोड़ की मशीन।

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Cancer patients will be treated with Dual Energy Linear TruBeam Varian Accelerator
हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर हॉस्पिटल गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में अब कैंसर का इलाज आसान हो जाएगा। हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर हॉस्पिटल के रेडियोथेरेपी विभाग में ड्यूल एनर्जी लीनियर ट्रूबीम वेरियन एक्सीलरेटर मशीन आ गई है। अब मरीजों को रेडिएशन से होने वाले साइड-इफेक्ट कम झेलने पड़ेंगे। यह मशीन सीधे कैंसरग्रस्त सेल्स को टारगेट करती है। इससे सामान्य सेल पर रेडिएशन का बुरा असर नहीं पड़ता है।

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जानकारी के मुताबिक 18 करोड़ रुपये की मशीन स्विटजरलैंड से आनी थी। इसके लिए चेंबर ऑफ इंडस्ट्री के अध्यक्ष विष्णु अजित सरिया और पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल की टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अनुदान देने की सिफारिश की थी। हॉस्पिटल के सचिव उमेश सिंघानिया ने बताया कि सीएम की सहमति के बाद साढ़े आठ करोड़ का अनुदान शासन से मिला है। पहले कोबाल्ट मशीन से इलाज किया जाता था। जल्द ही ड्यूल एनर्जी लीनियर ट्रूबीम वेरियन एक्सीलरेटर मशीन से इलाज किया जाएगा।
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ऐसे होता है इलाज
ड्यूल एनर्जी लीनियर ट्रूबीम वेरियन एक्सीलरेटर मशीन से सीधे कैंसर ट्यूमर वाले हिस्से पर रेडिएशन डाला जाता है, जो दूसरे सेल को बचाता है और केवल कैंसर सेल को खत्म करता है। इसमें दूसरी मशीनों के मुकाबले ज्यादा रेडिएशन निकलता है। इसी कारण इसे चलाने के दौरान रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट का होना जरूरी है। इससे मरीजों में साइड इफेक्ट की आशंका न के बराबर रहती है। कई बार मोशन की वजह से लार ग्रंथिया सूख जाती हैं, लेकिन इस मशीन से ऐसा नहीं होगा। न ही मरीजों की स्किन काली पड़ेगी।
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मशीन को इंस्टाल करने में 120 दिन लगेगा

हॉस्पिटल के रसेंदु फोगला ने बताया कि मशीन को इंस्टाल करने में 120 दिन लग जाएंगे। इसके लिए मुंबई एईआरबी से इजाजत लेनी पड़ेगी। एईआरबी यह तय करती है कि इसके रेडिएशन से कोई दुष्प्रभाव तो नहीं होगा। इसके बाद इसे चलाने की इजाजत मिलेगी।

चेंबर ऑफ इंडस्ट्री की मंशा, चैरिटी हॉस्पिटल हो स्थापित
चेंबर ऑफ इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल का कहना है कि जिस तरह से इंसेफेलाइटिस के लिए मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं हैं, उसी तरह कैंसर के लिए चैरिटेबल अस्पताल हो, जिससे यहां आने वालों का इलाज समय से हो सके। अगर ऐसा होता है तो पूर्वांचल के मरीजों को इलाज के लिए मुंबई जाने की जरूरत नहीं होगी।
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