बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बीएसएल-थ्री लैब तैयार, 30 अगस्त को हो सकता है उद्घाटन
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बीएसएल-थ्री (बॉयो सेफ्टी लैब) लगभग तैयार हो चुका है। दो से तीन दिन में अंतिम चरण का काम पूरा हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 30 अगस्त को इसका विधिवत उद्घाटन हो सकता है। इसे लेकर कॉलेज में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से एलएनटी कंपनी ने बॉयो सेफ्टी लैब लेवल तीन का निर्माण किया है। सूबे का यह पहला मेडिकल कॉलेज है, जहां पर बीएसएल-थ्री लैब होगा। रविवार से लैब में मशीनों की शिफ्टिंग भी शुरू हो जाएगी।
बेहद सुरक्षित मानी जाती है बीएसएल-थ्री लैब
संक्रमण को रोकने के मामले में बीएसएल-थ्री लैब बेहद सुरक्षित मानी जाती है। लैब में कर्मचारियों को संक्रमण का खतरा न के बराबर होता है। यहां कर्मचारी सिर्फ पीपीई किट में काम करेंगे। लैब में बाहर से हवा भी अंदर नहीं आ सकती। लैब के अंदर मौजूद संक्रमित हवा को फिल्टर करके बाहर निकाला जाता है। लैब के अंदर प्रयोग होने वाला पानी भी पूरी तरह से विसंक्रमित किया जाएगा।
प्रदेश की सबसे बड़ी बीएसएल-थ्री लैब
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तैयार हुई बॉयोसेफ्टी लैब का क्षेत्रफल करीब 2200 स्क्वायर फीट है। यह सूबे की सबसे बड़ी बीएसएल-थ्री लैब है। इसमें कोबॉस मशीन जल्द ही लगेगी। इसका ऑर्डर भी दिया जा चुका है। अक्तूबर माह में कोबॉस मशीन आने की उम्मीद है। कोबॉस मशीन की खासियत यह है कि एक बार में 1000 सैंपल की जांच चार घंटे में होगी। इसे जर्मनी की कंपनी बनाती है। इसके अलावा लैब में आरटी-पीसीआर मशीन भी लगेगी।
दो दर्जन से अधिक जानलेवा वायरस पर होगा शोध
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि यह लैब कई मायनों में खास है। इस लैब में येलो फीवर वायरस, वेस्ट नाइल वायरस, कोरोना वायरस, स्वाइन फ्लू वायरस और मर्स वायरस पर रिसर्च हो सकेगा। उनकी जांच व पहचान भी यहां होगी। इसके अलावा टीबी पर भी यहां रिसर्च किया जा सकता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए बीएसएल थ्री लैब बेहद अहम साबित होगी। इसे भविष्य की जरूरत को देखकर तैयार किया गया है। पूर्वी यूपी में कई प्रकार के वायरसों का प्रकोप रहता है। इस लैब में इनके बारे में शोध हो सकेगा। इससे कोरोना जांच की क्षमता भी बढ़ेगी।