Exclusive: एनईआर में खत्म हो जाएंगे अंग्रेजों के जमाने के रेल सिग्नल, तेजी से हो रहा काम
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे आधुनिकीकरण की ओर तेजी से अग्रसर है, रेल संबंधी सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे की बड़ी लाइनों पर पुराने सेमा-फोर सिग्नल पूरी तरह से हटा दिये गए हैं तथा उनके स्थान पर कलर लाइट सिग्नल लगाए गए हैं।
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गोरखपुर जिले के जल्द ही पूर्वोत्तर रेलवे में अंग्रेजों के जमाने में लगे रेल सिग्नल सेमा-फोर इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे। उनकी जगह सभी स्टेशनों पर आधुनिक तकनीक वाले कल सिग्नल नजर आएंगे। बड़ी लाइनों पर कलर सिग्नल लगा दिए गए हैं, जबकि छोटी लाइनों पर बचे तीन रूटों पर कार्य तेजी से चल रहा है।
दरअसल, सेमा फोर सिग्नल पूरी तरह मैकेनिकल हैं। इन्हें संचालित करने के लिए हर सिग्नल पर एक रेलकर्मी की तैनाती होती है। प्वाइंट बनाने के बाद रेलकर्मी सिग्नल देता है। इसमें तार के टूटने की आशंका बनी रहती है। इसके चलते कभी-कभी ट्रेनों को रोकना पड़ जाता है।
वहीं, मैकेनिकल सिग्नल की दृश्यता कम होने के चलते ड्राइवर को ट्रेन की गति धीमी करनी पड़ती है। इसके इतर कलर सिग्नल पूरी तरह से ऑनलाइन हैं। इसके लिए रेल की पटरियों के पास केबल बिछाया जाता है। जो यार्ड के दोनों ओर लगे सिग्नल से जुड़ा होता है। कलर सिग्नल एक किमी से ज्यादा दूर से ही ड्राइवर को नजर आने लगता है। जिसके हिसाब से वह ट्रेन की गति बढ़ाता और घटाता है।
एनईआर एक नजर में
- कुल रूट : 3470.9 किमी
- बड़ी लाइन : 3188.75 किमी
- छोटी लाइन : 282 किमी
- कुल स्टेशन : 500
इन छोटी लाइन रूटों पर चल रहा काम
शाहगढ़-पीलीभीत, इंदारा-दोहरीघाट, बहराइच-नानपारा-नेपालगंज
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे आधुनिकीकरण की ओर तेजी से अग्रसर है, रेल संबंधी सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे की बड़ी लाइनों पर पुराने सेमा-फोर सिग्नल पूरी तरह से हटा दिये गए हैं तथा उनके स्थान पर कलर लाइट सिग्नल लगाए गए हैं। कलर लाइट सिग्नल ज्यादा संरक्षित हैं तथा इनकी दृश्यता भी बहुत अच्छी है।