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यूपी का यह मंदिर समेटा है वर्षों पुराना इतिहास, यहां मिल चुका है पांचवी सदी का 'मृदभांड'
Fri, 29 Jan 2021 02:18 PM IST
vivek shukla
संजय उपाध्याय, महादेवा, बस्ती।
संजय उपाध्याय, महादेवा, बस्ती।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 29 Jan 2021 02:18 PM IST
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बेहिल नाथ का मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के महुली मार्ग से सोलहवें किलोमीटर पर विकास खंड बनकटी के बेहिल गांव में लगभग 150 वर्ष पुराना बाबा बेहिल नाथ का मंदिर अपने आप में सैकड़ों वर्षों का इतिहास समेटे है। यहां ईसा पूर्व पांचवीं सदी के मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) के टुकड़े मिल चुके हैं। ऐसे में यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर कई सदी पुराना है।
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पुजारी गिरिजेश गोस्वामी बताते हैं कि मेरे बाबा स्व. विशेश्वर गोस्वामी बताया करते थे कि वर्षों पूर्व यहां बहुत पतली आकार में शिवलिंग मिट्टी से निकले थे। बस्ती गजेटियर के अनुसार, बाबा बेहिल नाथ स्वयं में अनूठा शिवलिंग है। बाबा बेहिल नाथ मिट्टी के अष्टकोड़ीय अर्घें से प्राप्त हुए थे।
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उस समय के तत्कालीन जमींदार वजीर सिंह शिवलिंग को खुदवा कर अपने गांव ले जाना चाहते थे। लेकिन 10 फीट खुदाई करने के बावजूद शिवलिंग के जड़ का पता नहीं चला सका। इस बीच खोदाई के दौरान मिट्टी से अधिसंख्य बिच्छू, सांप तथा अन्य जहरीले जीव निकलने लगे। जिससे भयभीत होकर जमींदार ने खोदाई बंद करवा दी। इससे स्थानीय और क्षेत्र के जनता की आस्था व विश्वास और बढ़ गया।
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प्रत्येक सोमवार को लगता है मेला
सर्वप्रथम मंदिर इस सिद्ध स्थान का जीर्णोद्धार अमोढ़ा निवासी ब्राह्मण बाबा रामदेव जी ने कराया। इनकी भोलेनाथ में इतनी आस्था थी कि ब्रह्म मुहूर्त से सायं तक एक पांव पर खड़े होकर यह आराधना किया करते थे।
इस दौरान यहां कुछ ऐसे चमत्कार हुए कि लोग दूर-दूर से लोग अपनी मुरादें मांगने यहां आने लगे। बाबा बनारसी दास तथा भूरे यादव की अगुवाई में मंदिर का निर्माण हुआ। फिर बाद में अमरडोभा निवासी स्व. चंद्रिका सिंह व उनके पुत्र रमेश बहादुर सिंह की ओर से मंदिर का भव्य विस्तार हुआ ।
बेहिलनाथ मंदिर पर श्रद्धालुओं की ओर से प्रतिदिन जलाभिषेक किया जाता है। इसके साथ-साथ प्रत्येक सोमवार को यहां मेले जैसा दृश्य हो जाता है। सैकड़ों लोग कथा, रामायण, रुद्राभिषेक आदि तो करते ही हैं। भंडारा भी चलता रहता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर तथा श्रावण मास में तो यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालुओं की ओर से मुंडन व जनेऊ संस्कार के साथ अन्य धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।
इस दौरान यहां कुछ ऐसे चमत्कार हुए कि लोग दूर-दूर से लोग अपनी मुरादें मांगने यहां आने लगे। बाबा बनारसी दास तथा भूरे यादव की अगुवाई में मंदिर का निर्माण हुआ। फिर बाद में अमरडोभा निवासी स्व. चंद्रिका सिंह व उनके पुत्र रमेश बहादुर सिंह की ओर से मंदिर का भव्य विस्तार हुआ ।
बेहिलनाथ मंदिर पर श्रद्धालुओं की ओर से प्रतिदिन जलाभिषेक किया जाता है। इसके साथ-साथ प्रत्येक सोमवार को यहां मेले जैसा दृश्य हो जाता है। सैकड़ों लोग कथा, रामायण, रुद्राभिषेक आदि तो करते ही हैं। भंडारा भी चलता रहता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर तथा श्रावण मास में तो यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालुओं की ओर से मुंडन व जनेऊ संस्कार के साथ अन्य धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।