वन विभाग के इस सेंटर में जल्द ही बनने लगेंगे बांस के उत्पाद, प्रशिक्षण देने के लिए किया गया समझौता
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वन विभाग के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में अगले 15 दिनों में प्रशिक्षण कार्य शुरू हो सकता है। स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर इंडियन बैंबू रिसोर्स एंड टेक्नोलॉजी (सिबार्ट) ने दो दिन पहले प्रशिक्षण देने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडर स्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। डीएफओ ने पत्र विभागाध्यक्ष को भेज दिया है। अब सहमति मिलने का इंतजार है। बांस से बनने वाले विभिन्न तरह के उत्पादों के प्रशिक्षण के लिए संस्था ने चार सप्ताह में तीन लाख 96 हजार रुपये खर्च होने का प्रस्ताव दिया है।
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि दिसंबर से ही बैंबू योजना के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर को चलाने की योजना थी। इसके तहत महाराजगंज के वन चेतना केंद्र को तैयार किया गया था। मध्यप्रदेश से चार लाख रुपये की मशीनरी भी मंगवा ली गई थी, लेकिन काम शुरू होने से पहले ही कोरोना का संकट आ गया। अब इसे फिर से चलाने की योजना है। इसी के तहत सिबार्ट से समझौता किया गया है। अगले पंद्रह दिनों में प्रशिक्षण शुरू हो सकता है।
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि 20 लोगों को चार हफ्ते तक बांस के उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान सूप, डलिया और बांस के फर्नीचर, बांस की लाठी, बांस के हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग और बांस के घर बनाना सिखाया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में 37 जिलों में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए बंबू योजना को शुरू किया गया है। केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार बांस की खेती के प्रोत्साहन के लिए 50 प्रतिशत अनुदान भी देंगी।
पुलिस को मिल सकेंगी बांस की लाठियां
प्रशिक्षण के बाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर में बांस के उत्पाद बनने शुरू हो जाएंगे। दूसरे प्रदेशों को बांस के फर्नीचर सप्लाई किए जाएंगे। गोरखपुर में हैंडीक्राफ्ट के साथ सूप-डलिया तैयार किया जाएगा। झांसी में बांस की लाठी तैयार करने की योजना है। लाठियां पुलिस विभाग को बेंची जाएंगी। साथ ही बांस की कीलें बनाईं जाएंगी। लोहे की कील में एक साल में जंग लग जाता है, जबकि बांस की कील करीब पांच साल तक चलती है।
एक हेक्टेयर में बना है वन चेतना केंद्र
लक्ष्मीपुर ग्राम सभा की जमीन पर 2008 में वन चेतना केंद्र का निर्माण शुरू किया गया था, जोकि साल 2012 में बनकर तैयार हो गया था। एक हेक्टेयर में तैयार इस केंद्र का अभी तक कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है।