असलहा प्रकरण: रिटायर्ड कर्मी कैसे चलाएंगे गिरोह...डीएम ने लौटाई फाइल
डीएम दफ्तर से फर्जी दस्तावेजों पर असलहा लाइसेंस जारी करने के मुख्य आरोपी असलहा बाबू सहित तीन कर्मचारियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई में नया पेच फंस गया है। डीएम ने गैंगस्टर की कार्रवाई का आधार मांगा है। साथ ही आपत्ति लगा दी है कि सेवानिवृत्त और बर्खास्त कर्मी गिरोह कैसे संचालित कर सकते हैं।
पुलिस इस मामले में अब विधिक सलाह लेने जा रही है। हालांकि, पुलिस ने पहले भेजी गई फाइल में यह टिप्पणी लिखकर दी है कि ये लोग संगठित गिरोह संचालित करते रहे हैं। इसकी पुष्टि पुलिस की जांच में भी हो चुकी है। अन्य आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, फर्जी असलहा लाइसेंस प्रकरण में असलहा बाबू रहे राम सिंह और अशोक गुप्ता पहले ही बर्खास्त हो चुके हैं और विजय प्रताप श्रीवास्तव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन्हीं तीनों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की तैयारी है। पिछले पांच महीने से इनकी फाइल इधर-उधर हो रही है। पुलिस की ओर से फाइल भेजने के बाद प्रशासन की ओर से कोई न कोई आपत्ति लगाकर लौटा दी जाती है।
इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों पर डीएम के निर्देश पर मार्च 2021 में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कैंट अनिल उपाध्याय ने विजय प्रताप सिंह, विकास तिवारी, तनवीर, शमशेर आलम, प्रणय प्रताप सिंह, शमशाद, आजम लारी, शाहिद अली, अशफाक अहमद, विवेक मद्धेशिया, रवि प्रताप पांडेय अजय प्रताप गिरी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कराया। पूरी चार्जशीट नहीं होने की वजह से सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई नहीं हो पाई।
पूरक चार्जशीट की अनुमति तो मिल गई और यह दाखिल भी हो गया, लेकिन अभी तक कर्मचारियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जब तक इन पर केस दर्ज नहीं होगा, तब तक गैंगस्टर पूरा नहीं हो सकता है। एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि सभी आपत्तियों पर विधिक राय ली जा रही है, इसके बाद जवाब दिया जाएगा।
4 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का प्रकरण सामने आया था। गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रहने वाले तनवीर अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। तत्कालीन असलहा बाबू राम सिंंह ने इस मामले में केस दर्ज कराया था। पुलिस की जांच में पता चला कि असलहा बाबू रहे राम सिंह, पूर्व असलहा बाबू अशोक गुप्ता, सेवानिवृत्त बाबू विजय प्रताप श्रीवास्तव, संविदाकर्मी अजय प्रताप गिरी भी गिरोह से जुड़े थे। नाम प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने इनके साथ ही 15 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था।
विवेचना में आरोप की पुष्टि होने पर विजय प्रताप, विकास तिवारी, तनवीर, शमशेर आलम, प्रणय प्रताप, शमशाद, विजय प्रताप श्रीवास्तव, आजम लारी, शाहिद अली, अशफाक अहमद, विवेक मद्धेशिया, रवि प्रताप पांडेय, राम सिंह, अशोक गुप्ता और अजय प्रताप गिरी को आरोपी बनाया। लेकिन कुछ सरकारी कर्मियों की संलिप्तता की वजह से कुछ लोगों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की गई।