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पुरातात्विक स्थलों को खतरा: कुशीनगर के धरोहर चार महीने से पानी में हैं डूबे, नहीं हो पा रहा बचाव

Mon, 30 Aug 2021 07:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर Published by: vivek shukla Updated Mon, 30 Aug 2021 07:34 PM IST
सार

माथा कुंवर मंदिर और उसके सामने स्थित पुरातात्विक अवशेष बरसात में जलभराव से बने तालाब दिख रहे हैं। अब बरसात खत्म होने के बाद अक्तूबर-नवंबर में जब पानी सूखेगा, तब ही इनके दर्शन हो सकेंगे।

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Archaeological sites at risk of erosion at Kushinagar
भगवान बुद्ध के मुख्य मंदिर परिसर में स्थित पुरावशेष में भरा बारिश का पानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली से जुड़े कुशीनगर के अनेक पुरातात्विक स्थलों के क्षरण का खतरा बना हुआ है। क्योंकि पुरातात्विक स्थल बरसात भर पानी में डूबे रहते हैं। माथा कुंवर मंदिर, महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप के आसपास और अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी बरसात के पानी में डूबे हैं।

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मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर व माथा कुंवर मंदिर परिसर में बारिश का पानी भरा हुआ है। करीब ढाई हजार साल पुराने स्थलों को पानी से बचाने की दिशा में कोई कारगर इंतजाम नहीं हो पाया है। इन पुरातात्विक स्थलों के क्षरण का खतरा बना है।
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हालत यह है कि बारिश आरंभ होते ही मुख्य मंदिर के उत्तर तरफ स्थित छोटे-छोटे प्राचीन स्तूपों के अवशेष पानी में डूब जाते हैं। इसके अलावा दूसरे सबसे महत्वपूर्ण स्थान रामाभार स्तूप के बगल में ही पानी भरने से कई अवशेष डूब गए हैं।

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पुरातत्व विभाग को भेजा जाएगा पत्र

माथा कुंवर मंदिर और उसके सामने स्थित पुरातात्विक अवशेष बरसात में जलभराव से बने तालाब दिख रहे हैं। अब बरसात खत्म होने के बाद अक्तूबर-नवंबर में जब पानी सूखेगा, तब ही इनके दर्शन हो सकेंगे। इस बाबत पीडब्ल्यूडी के जेई आरएन राव का कहना है कि पानी में डूबे रहने से पुरावशेषों का क्षरण होता है।

हालांकि, सारनाथ मंडल के पुरातत्वविद् नीरज सिन्हा का कहना है कि पानी में डूबने से उत्खनित पुरावशेषों को कोई नुकसान नहीं होता। विभाग हर साल पानी हटने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करा देता है। हालांकि उन्होंने इसका एक मसौदा तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली को भेजने की भी बात कही है। मसौदा संस्कृति मंत्रालय में लंबित है।

पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती ने कहा कि महापरिनिर्वाण मंदिर, माथा कुंवर मंदिर व रामाभार स्तूप परिसर में पानी में डूबे उत्खनित पुरावशेषों का निरीक्षण किया गया है। ये तीनों स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षित स्थल हैं। इसलिए यहां से जल निकासी के लिए रिपोर्ट तैयार कराकर विभाग को पत्र भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधीक्षण पुरातत्वविद से भी वार्ता की जाएगी। इन स्थलों पर भविष्य में जलभराव न हो, इसके लिए बंदोबस्त किया जाएगा।

 

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