फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   An injured vulture was found in Sikta village of Khesraha forest range in Siddharthnagar.

Gorakhpur News: जटायु को रास आई तराई की आबो-हवा...हिमालय की तलहटी पसंदीदा ठिकाना

Sun, 04 Jan 2026 12:19 PM IST
रोहित सिंह वीरेंद्र पांडेय
वीरेंद्र पांडेय Published by: रोहित सिंह Updated Sun, 04 Jan 2026 12:19 PM IST
सार

कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकीं दुर्लभ प्रजातियां स्लेंडर-बिल्ड (पतली चोंच वाला गिद्ध) और व्हाइट-रंप्ड (सफेद पूंछ वाला गिद्ध) की लगातार आमद ने संकेत दे दिया है कि यहां की आबो-हवा उन्हें खूब रास आ रही है। 

विज्ञापन
An injured vulture was found in Sikta village of Khesraha forest range in Siddharthnagar.
सिद्धार्थनगर के खेसरहा वन रेंज के सिकटा गांव में घायल अवस्था में मिला गिद्ध - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पूर्वी एशिया, चीन, अफगानिस्तान जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध का सिद्धार्थनगर में बीमार हालत में मिलना भले ही फौरी समस्या हो, लेकिन तराई क्षेत्र के वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह एक सुखद खबर है।

विज्ञापन


कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकीं दुर्लभ प्रजातियां स्लेंडर-बिल्ड (पतली चोंच वाला गिद्ध) और व्हाइट-रंप्ड (सफेद पूंछ वाला गिद्ध) की लगातार आमद ने संकेत दे दिया है कि यहां की आबो-हवा उन्हें खूब रास आ रही है। हिमालय की तलहटी में नेपाल से सटा इलाका, जटायु का पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है।
विज्ञापन


सिद्धार्थनगर की डीएफओ नीला एम. का कहना है गिद्धों के संरक्षण की पहल अब रंग लाने लगी है। तराई बेल्ट देश का सबसे भरोसेमंद वर्चुअल वल्चर हैबिटैट बनता जा रहा है। हालांकि, विकास की रफ्तार और आधुनिक खेती के साइड इफेक्ट अब भी इनके अस्तित्व के लिए चुनौती बने हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालिया सर्वेक्षणों के मुताबिक सिद्धार्थनगर के साथ ही श्रावस्ती, महाराजगंज और लखीमपुर खीरी समेत हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों में गिद्धों की नियमित मौजूदगी दर्ज की जा रही है।


नेपाल के तराई क्षेत्रों में व्हाइट-रंप्ड गिद्धों की कॉलोनियां बीते एक दशक से स्थिर हैं, जिसका सीधा असर सीमा से सटे भारतीय इलाकों में भी दिख रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खुले जंगल, पर्याप्त भोजन और अनुकूल जलवायु ने इस क्षेत्र को गिद्धों के लिए सुरक्षित आश्रय बना दिया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed