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Gorakhpur News: कंप्यूटर से जोड़कर संस्कृत को आगे बढ़ाएगा गोरखपुर विश्वविद्यालय

Sun, 15 Feb 2026 02:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 02:53 AM IST
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An effort has been initiated to generate interest in Sanskrit, which is being marginalized in the changing times.
गोरखपुर। बदलते दौर में हाशिए पर पहुंचे संस्कृत के प्रति रुचि जगाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कवायद शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन कंप्यूटर से जोड़कर संस्कृत को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। इसे मूर्त रूप देने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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डीडीयू ही नहीं लगभग सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत विषय को लेकर हाल के दशकों में विद्यार्थियों की रुचि घटी है। कारण यह है कि संस्कृत ज्ञान की भाषा तो है लेकिन इसे उस स्तर पर प्रयोग में नहीं लाया जा सका है, जहां होना चाहिए। संस्कृत के पुराने ग्रंथ इंटरनेट पर नहीं। इंटरनेट पर चारों वेद (ऋग्वेद, समवेद, युजर्वेद व अथर्ववेद), ब्राह्मण ग्रंथ, उपनिषद के मंत्र तो मिल जाएंगे लेकिन मूल भाव नहीं मिलता है। कई बार अलग-अलग स्रोतों से हिंदी या अंग्रेजी में एक ही मंत्र के अलग-अलग भाव दिखते हैं। इससे आम पाठक यह समझ नहीं पाता कि कौन सा कंटेंट सही है।
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डीडीयू की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे प्रमाणिक अनुवाद
डीडीयू के संस्कृत विभाग के समन्वयक डॉ. देवेंद्र पाल के मुताबिक, गूगल या एआई सर्च करने पर संस्कृत से जुड़े कई तथ्य सामने नहीं आते। संस्कृत को कंप्यूटर से जोड़ने से संस्कृत के अनुवाद विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। संस्कृत को रोचक बनाने के लिए प्राथमिक तौर पर उपाय किए जा रहे हैं। अधिकृत स्रोत पर संस्कृत से जुड़े कंटेंट उपलब्ध होंगे तो वह प्रमाणिक भी होगा। निर्देश मिलने के बाद इसका फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है।
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बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि संस्कृत को कंप्यूटर से जोड़कर आगे बढ़ाएंगे। इसके लिए विभागीय शिक्षकों के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इंटरनेट व एआई के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
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