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BRD Gorakhpur: गोरखपुर में कराहते रहिए, एक महीने बाद होगा मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड

Thu, 02 Jun 2022 01:26 PM IST
vivek shukla संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 02 Jun 2022 01:26 PM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस का हाल बेहाल है। अल्ट्रासाउंड के लिए एक महीने की वेटिंग है, मरीज के साथ डॉक्टर भी परेशान हो रहे हैं। एक मशीन खराब पड़ी है, ठीक मशीन से अल्ट्रासाउंड की तस्वीर धुंधली आ रही है।

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Amar Ujala investigation of Gorakhpur BRD
गोरखपुर बीआरडी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस में अल्ट्रासाउंड कराने की वेटिंग लिस्ट लंबी है। आउटडोर पेशेंट (ओपीडी) और इनडोर पेशेंट (आईपीडी) इलाज कराने के बाद कराहते रहते हैं, लेकिन तत्काल अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। मरीजों को एक महीने बाद बुलाया जाता है।

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मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने वाले मरीजों के अल्ट्रासाउंड करवाने की जद्दोजहद की पड़ताल बुधवार को अमर उजाला संवाददाता ने की। जो तथ्य निकलकर सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं। बुधवार को जिन मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका, उन सबको अब 30 जून को बुलाया गया है। इसका मतलब है कि अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों की वेटिंग एक महीने की है। रोज जितने मरीज आते हैं, उन सबके अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाते हैं। वेटिंग में नाम डाले जाने से नाराज एक मरीज के परिजनों ने हंगामा भी किया है।
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परिजनों का कहना था कि मरीज की हालत गंभीर है, फिर भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इस बीच पता चला कि डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस में सुविधा-संसाधनों की कमी है। जिस मशीन से अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। अगर मरीज की सेहत अच्छी (मोटापा) है तो अल्ट्रासाउंड की तस्वीर धुंधली आती है। इससे रिपोर्ट बनाने में दिक्कत होती है। इस व्यवस्था से मरीज व तीमारदार परेशान हैं।  
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Amar Ujala investigation of Gorakhpur BRD
गोरखपुर बीआरडी। - फोटो : अमर उजाला।

अल्ट्रासाउंड के लिए एक महीने आगे की तारीख

31 मई 2022 को ओपीडी व आईपीडी में इलाज के बाद 50 से ज्यादा मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इन मरीजों को 29 जून को बुलाया गया है। इनमें से कई मरीज ऐसे हैं, जिनके पेट में असहनीय दर्द था। महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। इसी तरह एक जून (बुधवार) को 30 से ज्यादा मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जा सका है। इन मरीजों को अल्ट्रासाउंड की अगली डेट 30 जून दी गई है।  

हर दिन बढ़ती है वेटिंग

इस डिपार्टमेंट में रोजाना करीब 100 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने आते हैं। इनमें से 50-55 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। जो मरीज बचते हैं, उनको वेटिंग में डाल दिया जाता है। गोरखपुर, बस्ती, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर के साथ ही बिहार, नेपाल के भी मरीज आते हैं।

एक मशीन खराब, दूसरे की तस्वीर ही धुंधली

डिपार्टमेंट ऑफ रेडिया डायग्नोसिस में अल्ट्रासाउंड की दो मशीनें हैं। एक मशीन लंबे समय से खराब व बंद पड़ी है। एक मशीन से ही अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। इस मशीन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। अगर मरीज मोटा रहता है तो अल्ट्रासउंड की तस्वीर धुंधली आती है। इससे रिपोर्ट बनाने में दिक्कत होती है। धुंधली तस्वीर के सहारे ही डॉक्टर अंदाजा लगाकर रिपोर्ट बनाते हैं।

 

Amar Ujala investigation of Gorakhpur BRD
गोरखपुर बीआरडी। - फोटो : अमर उजाला।

बाहर से जांच में 800 रुपये अतिरिक्त शुल्क

मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड की फीस 200 रुपये है, लेकिन यही जांच निजी पैथालॉजी में एक हजार रुपये में होती है। यानी बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों को 800 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। वेटिंग लिस्ट में नाम आने से चिंतित तमाम मरीज बाहर से ही अल्ट्रासाउंड कराने पर विवश हैं।  

डॉक्टर भी परेशान, प्रस्ताव पर अमल नहीं

मरीजों के दबाव व मशीन की खराब गुणवत्ता से डिपार्टमेंट के डॉक्टर भी परेशान हैं। सूत्रों का कहना है कि रोज मरीजों का दबाव रहता है। सुबह नौ बजे से रात 9:30 बजे तक लगातार अल्ट्रासाउंड किया जाता है, फिर भी राहत नहीं मिल रही है। मरीजों की वेटिंग लिस्ट लगातार बढ़ती ही जा रही है। नई व उच्च गुणवत्ता की अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाने का प्रस्ताव कई बार भेजा जा चुका है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुबह से रात तक मरीज व उनके तीमारदार डिपार्टमेंट के बाहर खड़े रहते हैं। कई बार विवाद की नौबत आती है। हंगामा तक होता है।

एमडी की तीन सीटें, पर्याप्त सुविधा-संसाधन नहीं

डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस में एमडी की तीन सीटें हैं। इस डिपार्टमेंट में दूसरे बैच की दाखिला प्रक्रिया भी पूरी हुई है, लेकिन सुविधा-संसाधनों का अभाव है। लिहाजा, एमडी की पढ़ाई ढंग से नहीं हो पा रही है। अब उच्च गुणवत्ता की अल्ट्रासाउंड मशीनों का जमाना है, लेकिन डिपार्टमेंट में पुरानी पड़ी एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन से काम चलाया जा रहा है।

गोरखपुर डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि मामले की जांच कराके जिम्मेदारी तय की जाएगी। अल्ट्रासाउंड मशीनों की खराबी भी दूर कराई जाएगी।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि अल्ट्रासाउंड मशीन की गुणवत्ता बेहतर है। वेटिंग नहीं है। मरीजों का अल्ट्रासाउंड नियमित ढंग से कराया जा रहा है। खराब मशीन भी जल्द ही ठीक कराई जाएगी। मरीज व तीमारदारों की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है।
 

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