कैंपस डायरी: कुंडली बांचकर साहब करा ले रहे हर काम, ऐसा है यहां काम
बड़े साहब से लेकर छोटे साहब, बाबू, चपरासी तक की कुंडली बांचकर हर काम की गोटी सेट करा ले रहे हैं। कुंडली बांचकर ही साहब ने अपने पुत्र को संस्थान के एक बड़े विभाग में सेट करा दिया है। अब जब बड़े साहब पत्र भेजकर कोई काम कहते हैं, तो वह बड़े साहब के सामने उपस्थित होकर उनकी कुंडली बचाना शुरू कर देते हैं।
विस्तार
पूर्वांचल के एक बड़े चिकित्सा संस्थान में एक डॉक्टर साहब हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि नई-नई बीमारियों पर शोध करें। लेकिन, साहब ने मूल काम को किनारे कर कुंडली बांचना शुरू कर दिया है। कुंडली बांचने का प्रभाव ऐसा है कि उनका हर काम उसी के बल पर हो जा रहा है।
बड़े साहब से लेकर छोटे साहब, बाबू, चपरासी तक की कुंडली बांचकर हर काम की गोटी सेट करा ले रहे हैं। कुंडली बांचकर ही साहब ने अपने पुत्र को संस्थान के एक बड़े विभाग में सेट करा दिया है। अब जब बड़े साहब पत्र भेजकर कोई काम कहते हैं, तो वह बड़े साहब के सामने उपस्थित होकर उनकी कुंडली बचाना शुरू कर देते हैं।
कुंडली के बल पर बड़े साहब की प्रोन्नति से लेकर यश और कीर्ति पूरे संसार में फैला देते हैं। इससे बड़े साहब भी बेहद खुश हो जाते हैं। अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों को लगता है कि डॉक्टर साहब ने कुंडली बचाने की अलग से पढ़ाई की है, लेकिन वे लोग नहीं जानते कि यह कुंडली देखने की विद्या उन्हें गूगल बाबा ने दी है। अब संस्थान में इस बात की चर्चा छिड़ गई है कि कहीं विभाग को कुंडली बांचाने वाले विभाग का तमगा न मिल जाए।
बवाल-ए-जान बना है सर्वर
बीते एक महीने से सर्वर के चलते गोरखपुर विश्वविद्यालय और कॉलेजों के बीच खूब किचकिच हो रही है। सेमेस्टर शुल्क जमा करने में सर्वर जब बाधा बना तो मुखिया के निर्देश पर दो बार अंतिम तिथि बढ़ाई गई।
विलंब शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि के पहले फिर सर्वर ने धोखा दे दिया। प्रशासनिक भवन में काम करने वाले कर्मचारी अब दबी जुबान कहने लगे हैं कि भारी भरकम खर्च करके लगाया गया सर्वर, बवाल-ए-जान बन गया है। कब, कौन छात्रों के गुस्से का शिकार हो जाए भगवान ही मालिक हैं।
निशाने पर लगा मैडम का तीर
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएड प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में एक महाविद्यालय के छात्रों को ऐन वक्त पर परीक्षा से रोक दिया। खूब हंगामे और धरना-प्रदर्शन के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो महाविद्यालय की मैडम छात्रों को लेकर विश्वविद्यालय पहुंच गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने मुश्किल यह कि सीएम शहर में थे। मामला तूल न पकड़े, इसके लिए परीक्षा कराने की अनुमति दे दी गई।
इस प्रकरण को लेकर विवि के दो कर्मचारी बात कर रहे थे। एक ने कहा, जब परीक्षा करानी ही थी तो इतना हंगामा होने देने की जरूरत क्या थी। दूसरे ने कहा, अरे यार देखा, छात्रों को मैडम ने आगे कर दिया। उनका तीर एकदम निशाने पर लगा है।