Gorakhpur: गोरखपुर में फरियादी हैरान, अचानक कहां चले गए कलेक्ट्रेट के अफसर
डीएम, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट समेत सभी कार्यालय पर्यटन विभाग में शिफ्ट, अब कलेक्ट्रेट में सिर्फ एडीएम फाइनेंस, सीआरओ और एआरओ कार्यालय ही बचे।
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गोरखपुर जिले के गोला तहसील क्षेत्र के रहने वाले रामाज्ञा, जमीन विवाद को लेकर सोमवार को प्रार्थनापत्र देने डीएम कार्यालय पहुंचे तो वहां दरवाजा बंद मिला। इसी तरह चौरीचौरा के बघारपुर निवासी अब्बास अली अपने मुकदमे की तारीख पर पैरवी के लिए एडीएम प्रशासन के न्यायालय पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर घबरा गए।
न्यायालय कक्ष का पूरा सेट-अप उखड़ा हुआ मिला। सारी कुर्सियां गायब थीं। बगल में स्थित एडीएम सिटी कार्यालय के पास खड़े होमगार्ड से जब उन्होंने पूछा तो बताया गया कि कलेक्ट्रेट पूरी तरह क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय में शिफ्ट हो गया है। ये तो बानगी हैं। ऐसे कई फरियादियों को पूर्व में कोई सटीक सूचना नहीं होने की वजह से परेशान होना पड़ा।
कलेक्ट्रेट की शिफ्टिंग का काम पिछले सप्ताह से चल रहा है, मगर अभी डीएम और एडीएम कार्यालय के शिफ्ट होने की कोई तारीख नहीं तय हुई थी। सोमवार को अचानक डीएम-एडीएम समेत सभी अफसर पर्यटन विभाग में शिफ्ट हो गए। डीएम कृष्णा करूणेश ने वहीं पर फरियादियों की समस्याएं सुनीं। डीएम ने बताया कि कलेक्ट्रेट स्थित संयुक्त कार्यालय समेत कई कार्यालय पहले ही शिफ्ट हो चुके थे।
कलेक्ट्रेट की नई इमारत का निर्माण कार्य शुरू होने में देरी न हो, इसलिए बचे हुए अफसरों के कार्यालय भी सोमवार को शिफ्ट कर दिए गए। सिर्फ एडीएम फाइनेंस, सीआरओ और एआरओ कार्यालय अभी नहीं शिफ्ट होगा। अब निर्माण कार्य पूरा होने तक बाकी सभी अफसरों के कार्यालय पर्यटन विभाग में ही संचालित होंगे।
117 साल पुरानी है कलेक्ट्रेट की इमारत
कलेक्ट्रेट की पुरानी इमारत 117 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1903 में शुरू हुआ था और 1910 में इसे पूरा किया गया था। इसे तोड़ने पर करीब 20 लाख रुपये का खर्च आएगा। इसका टेंडर हो चुका है। इसी स्थान पर 65 करोड़ की लागत से नया एकीकृत भवन बनाया जाएगा, जो सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।