Gorakhpur: कानपुर की कमला के पार्थिव शरीर से पढ़ेंगे एम्स के छात्र, आंखों से रोशन होगी दूसरों की दुनिया
बुधवार सुबह 10 बजे कानपुर से पार्थिव शरीर लेकर माधवी सेंगर के साथ शाम 5:30 बजे गोरखपुर पहुंचे, जहां एनाटमी हेड डॉ. विवेक मिश्रा ने सहयोगियों के साथ देह को ससम्मान स्वीकार किया। कानपुर से देह को रवाना करते समय कमला के दोनों पुत्र सर्वेश कुमार मिश्रा और नरेश कुमार मिश्रा सहित मोहन बिहारी द्विवेदी और उनके रिश्तेदार मौजूद थे।
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कानपुर की कमला देवी मिश्रा की आंखों से अब दूसरों की दुनिया रोशन होगी। जबकि, उनके पार्थिव शरीर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छात्र पढ़ाई करेंगे।
युग दधीचि संस्थान कानपुर ने एम्स गोरखपुर को कमला देवी का पार्थिव शरीर बुधवार को उपलब्ध कराया है। इस पर एम्स प्रशासन ने संस्थान और उनके परिवार के प्रति आभार जताया है। इससे पहले कमला की कर्निया कानपुर मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराई गई है।
जानकारी के मुताबिक, योगेंद्र विहार नई बस्ती कानपुर निवासी कमला देवी मिश्रा (78) ने वर्ष 2014 में देहदान संकल्प पत्र भरा था। आठ नवंबर रात 10 बजे उनका निधन हो गया। निधन होने की जानकारी उनके पुत्र नरेश मिश्रा ने दधीचि देहदान संस्थान के देहदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर को फोन कर देते हुए देहदान का आग्रह किया।
इस पर मनोज सेंगर ने अपनी पत्नी व संस्थान की महासचिव माधवी सेंगर से परामर्श कर पार्थिव शरीर को एम्स गोरखपुर को दान करने का फैसला लिया। इससे पहले मनोज ने कानपुर मेडिकल कॉलेज की नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन से संपर्क कर रात एक बजे कर्निया का दान कराया।
संस्थान ने अब तक उपलब्ध कराए हैं 247 शरीर
बुधवार सुबह 10 बजे कानपुर से पार्थिव शरीर लेकर माधवी सेंगर के साथ शाम 5:30 बजे गोरखपुर पहुंचे, जहां एनाटमी हेड डॉ. विवेक मिश्रा ने सहयोगियों के साथ देह को ससम्मान स्वीकार किया। कानपुर से देह को रवाना करते समय कमला के दोनों पुत्र सर्वेश कुमार मिश्रा और नरेश कुमार मिश्रा सहित मोहन बिहारी द्विवेदी और उनके रिश्तेदार मौजूद थे।
कानपुर की दधीचि देहदान संस्थान ने वर्ष 2003 से लोगों को देहदान के लिए प्रेरित किया है। संस्था अब तक प्रदेश में कुल 247 पार्थिव शरीर चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध करा चुका है। साथ ही 3,200 से अधिक लोगों ने देहदान करने का शपथ पत्र भरा है। इनमें महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। संस्था ने अब तक 800 से अधिक नेत्रहीन लोगों को निशुल्क कार्निया प्रत्यारोपण भी कराया है।
तीन साल बाद मिला एम्स को शरीर
दधीचि देहदान संस्थान ने अक्तूबर 2019 में एम्स को पहला शरीर ज्योतिमा दीक्षित का उपलब्ध कराया था। इसके बाद डॉ. संतलाल की देह दिसंबर 2019 में दान की गई। कोरोना के कारण तीन साल तक कोई दान नहीं हो सका। तीसरा देहदान बुधवार को हुआ है।