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एम्स: खूब सुविधाएं जुटाईं...कर्मचारियों की कमी रह गई कसर- मरीजों पर पड़ रहा असर
Mon, 04 Mar 2024 06:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2024 06:03 PM IST
सार
गोरखपुर एम्स ने खूब सुविधाएं जुटाईं हैं। लेकिन, कर्मचारियों के कमी की कसर रह गई। इससे मरीजों पर असर पड़ रहा है।
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गोरखपुर एम्स
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पूर्वांचल में मरीजों के इलाज का सबसे बड़ा केंद्र गोरखपुर एम्स कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। चार साल में यहां खूब सुविधाएं जुटा ली गईं, लेकिन डॉक्टर से लेकर कर्मचारियों के रिक्त पदों की वजह से इसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा। स्थिति यह है कि इस अस्पताल में अभी भी 750 बेड के बजाय केवल 450 बेड पर ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
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वर्ष 2019 में गोरखपुर एम्स का उद्घाटन हुआ था। अब यहां सर्जरी, महिला रोग, बाल रोग, हड्डी रोग, दंत रोग, मानसिक रोग, आयुष आदि विभागों का संचालन हो रहा है। 30 बेड की इमरजेंसी सुविधा भी है, लेकिन इंडोर में अभी कम मरीज ही भर्ती किए जा रहे हैं। शनिवार को ब्लड बैंक और डायलिसिस यूनिट का उद्घाटन हुआ।
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इस दौरान एम्स में बेहतर सुविधाओं का दावा तो किया गया, लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते प्रभावित हो रही सेवाओं का मामला भी उठा।
एम्स प्रेसिडेंट देश दीपक वर्मा ने संस्थान की प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि अब यहां ओपीडी में हर दिन करीब ढाई हजार मरीज देखे जा रहे हैं। अब तक 16 लाख से अधिक मरीज ओपीडी में आ चुके हैं, लेकिन इंडोर की व्यवस्था ठीक नहीं है।
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सबसे अधिक किल्लत नर्सिंग स्टॉफ की
इंडोर में मरीज भर्ती करने में सबसे अधिक दिक्कत नर्सिंग स्टॉफ की कमी के चलते आ रही है। बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर के अलावा भर्ती मरीज को समय-समय इंजेक्शन, ड्रेसिंग, दवा खिलाने से लेकर बेड और वार्ड की सफाई जरूरी है। एक तो अधिकांश विभागों में जूनियर और सीनियर डॉक्टरों की कमी है, ऊपर से नर्सिंग स्टॉफ भी नहीं हैं। इस वजह से कम संख्या में ही मरीज भर्ती किए जा रहे।
कार्यकारी निदेशक एम्स डॉ. जीके पाल ने कहा कि डॉक्टर व अन्य सपोर्टिंग स्टॉफ की कमी के चलते दिक्कत आ रही है। हम अभी 450 बेड ही क्रियाशील कर पाए हैं। डॉक्टरों के प्रमोशन के अलावा अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। व्यवस्था को पटरी पर लाने में करीब तीन महीने और लगेंगे। जून तक सभी विभागों में बेड के अनुरूप मरीज भर्ती किए जाने की स्थिति हो जाएगी।
प्रेसिडेंट गवर्निंग बॉडी- एम्स, देश दीपक वर्मा ने बताया कि मैंने पिछले वर्ष एम्स के अपने पहले विजिट में ही तत्कालीन कार्यकारी निदेशक को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे। उनके बाद नए कार्यकारी निदेशक ने इस ओर ध्यान दिया और अब 450 बेड क्रियाशील हो गए हैं। शेष बेडों को भी मरीज भर्ती के अनुकूल बनाने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं। जल्द ही यहां कई और नई सुविधाएं शुरू होंगी।