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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय के 75 साल के सफर पर तैयार होगी किताब
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 75 वर्षों के सफर को पुस्तक के रूप में संकलित किया जाएगा। इसके साथ ही स्थापना काल से प्रकाशित होने वाली, लेकिन दशकों पहले बंद हो चुकी विश्वविद्यालय पत्रिका को भी दोबारा शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए पत्रिका के पुराने अंकों का संकलन कर पुनर्प्रकाशन का सुझाव दिया गया है।
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने सोमवार को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता, संस्कृत एवं प्राकृत भाषा, दर्शनशास्त्र, उर्दू और अंग्रेजी विभागों की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से संवाद कर शैक्षणिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने अपनी अकादमिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और विभागीय प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की।
संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की समीक्षा के दौरान कुलपति ने संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरस्वती विद्यालयों जैसे शिक्षण संस्थानों से संपर्क और समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पालि स्नातक पाठ्यक्रम में श्रीलंका, इंडोनेशिया, चीन, जापान और थाईलैंड के विद्यार्थियों को आकर्षित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया। इसके साथ ही विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक सहयोग विकसित करने और ज्योतिष विषय में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया।
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योग पाठ्यक्रमों को एकीकृत करने का सुझाव
दर्शनशास्त्र विभाग की समीक्षा के दौरान कुलपति ने एमए इन योग और पीजी डिप्लोमा इन योग पाठ्यक्रमों को एकीकृत कर डिग्री और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के रूप में संचालित करने का सुझाव दिया। विभाग के चार शिक्षकों ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और अकादमिक प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया।
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शिक्षकों ने साझा किया अकादमिक प्रोफाइल
हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार मिश्र ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों ने कनिष्ठता से वरिष्ठता क्रम में अपने अकादमिक प्रोफाइल, शोध कार्यों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग में आठ स्थायी शिक्षकों और एक स्ववित्तपोषित शिक्षिका ने प्रस्तुतियां दीं। कला संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने कुलपति का स्वागत किया। प्रस्तुतियों का समन्वय डॉ. देवेंद्र पाल ने किया। उर्दू विभाग में डॉ. साजिद हुसैन और डॉ. महबूब हसन ने विभागीय गतिविधियों और अपनी अकादमिक उपलब्धियों की जानकारी दी। वहीं, अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू ने विभाग की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों, उपलब्धियों और प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। इसके बाद विभाग के अन्य शिक्षकों ने भी अपना अकादमिक प्रोफाइल साझा किया। समीक्षा के दौरान कला संकायाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव उपस्थित रहे।
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कुलपति प्रो. केपी सिंह ने सोमवार को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता, संस्कृत एवं प्राकृत भाषा, दर्शनशास्त्र, उर्दू और अंग्रेजी विभागों की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से संवाद कर शैक्षणिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने अपनी अकादमिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और विभागीय प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की।
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संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की समीक्षा के दौरान कुलपति ने संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरस्वती विद्यालयों जैसे शिक्षण संस्थानों से संपर्क और समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पालि स्नातक पाठ्यक्रम में श्रीलंका, इंडोनेशिया, चीन, जापान और थाईलैंड के विद्यार्थियों को आकर्षित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया। इसके साथ ही विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक सहयोग विकसित करने और ज्योतिष विषय में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया।
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योग पाठ्यक्रमों को एकीकृत करने का सुझाव
दर्शनशास्त्र विभाग की समीक्षा के दौरान कुलपति ने एमए इन योग और पीजी डिप्लोमा इन योग पाठ्यक्रमों को एकीकृत कर डिग्री और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के रूप में संचालित करने का सुझाव दिया। विभाग के चार शिक्षकों ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और अकादमिक प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया।
शिक्षकों ने साझा किया अकादमिक प्रोफाइल
हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार मिश्र ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों ने कनिष्ठता से वरिष्ठता क्रम में अपने अकादमिक प्रोफाइल, शोध कार्यों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग में आठ स्थायी शिक्षकों और एक स्ववित्तपोषित शिक्षिका ने प्रस्तुतियां दीं। कला संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने कुलपति का स्वागत किया। प्रस्तुतियों का समन्वय डॉ. देवेंद्र पाल ने किया। उर्दू विभाग में डॉ. साजिद हुसैन और डॉ. महबूब हसन ने विभागीय गतिविधियों और अपनी अकादमिक उपलब्धियों की जानकारी दी। वहीं, अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू ने विभाग की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों, उपलब्धियों और प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। इसके बाद विभाग के अन्य शिक्षकों ने भी अपना अकादमिक प्रोफाइल साझा किया। समीक्षा के दौरान कला संकायाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव उपस्थित रहे।