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कोरोना : गोरखपुर में कागजों में मरने वाले 848, आर्थिक मदद के लिए आवेदन आए दोगुने से अधिक
Sat, 25 Dec 2021 01:53 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 25 Dec 2021 01:53 PM IST
सार
पचास हजार की आर्थिक मदद के लिए अब तक गोरखपुर जिले में 1832 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें सरकारी सूची में कोराना से मरने वाले 848 दर्ज हैं, अब इनके अलावा 984 लोग सामने आए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सरकारी कागजों में जिले में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या 848 दर्ज है, लेकिन 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद के लिए अब तक 1832 लोगों के परिजनों ने आवेदन किया है। इस तरह जिले में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दर्ज नामों से दोगुना से अधिक हो गई है। प्रशासन इन लोगों का सत्यापन कराकर भुगतान कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब भी करीब 500 आवेदन पाइपलाइन में हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार की ओर से कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 50-50 हजार की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके लिए प्रशासन की ओर से आवेदन मांगे गए हैं। अब तक सरकारी आंकड़ों में दर्ज 848 नामों के अलावा 984 लोगों के परिजनों की तरफ से आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया जा चुका है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक करीब 500 आवेदन अब भी पाइपलाइन में हैं। इनका सत्यापन आदि कराया जा रहा है।
हालांकि शासन को भी इसका अंदेशा था कि कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दर्ज आंकड़ों से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सूची में दर्ज 848 लोगों के परिवार को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने के लिए 4.24 करोड़ रुपये तो उपलब्ध कराए ही गए हैं। अलग से जुड़ने वाले नामों के लिए भी पांच करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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बताया जा रहा है कि कोरोना काल में बहुत से ऐसे लोग थे जो संक्रमित होकर घर पर ही जान गंवा बैठे। बहुत से ऐसे हैं जिनकी एंटीजन जांच ही हो पाई थी और उनकी हालत अचानक खराब होने से वे गुजर गए। ऐसे केसों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन तक नहीं पहुंच सकी, जिस वजह से सरकारी कागजों में उनके नाम कोरोना से मरने वालों की सूची में नहीं दर्ज हो सके।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार की ओर से कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 50-50 हजार की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके लिए प्रशासन की ओर से आवेदन मांगे गए हैं। अब तक सरकारी आंकड़ों में दर्ज 848 नामों के अलावा 984 लोगों के परिजनों की तरफ से आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया जा चुका है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक करीब 500 आवेदन अब भी पाइपलाइन में हैं। इनका सत्यापन आदि कराया जा रहा है।
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हालांकि शासन को भी इसका अंदेशा था कि कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दर्ज आंकड़ों से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सूची में दर्ज 848 लोगों के परिवार को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने के लिए 4.24 करोड़ रुपये तो उपलब्ध कराए ही गए हैं। अलग से जुड़ने वाले नामों के लिए भी पांच करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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बताया जा रहा है कि कोरोना काल में बहुत से ऐसे लोग थे जो संक्रमित होकर घर पर ही जान गंवा बैठे। बहुत से ऐसे हैं जिनकी एंटीजन जांच ही हो पाई थी और उनकी हालत अचानक खराब होने से वे गुजर गए। ऐसे केसों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन तक नहीं पहुंच सकी, जिस वजह से सरकारी कागजों में उनके नाम कोरोना से मरने वालों की सूची में नहीं दर्ज हो सके।
सूची के अतिरिक्त यहां से इतने पीड़ितों के आवेदन आए
सदर तहसील 656सहजनवां तहसील 53
कैंपियरगंज तहसील 46
गोला तहसील 41
बांसगांव तहसील 71
खजनी तहसील 45
चौरीचौरा तहसील 72
कुल 984
नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग से मांगी सूची
पूर्व में तैयार सूची में दर्ज 848 मृतकों के अतिरिक्त जिन लोगों के नाम पर आवेदन आ रहे हैं, उनके सत्यापन के लिए आपदा विभाग ने नगर निगम से राजघाट पर मौजूद मृतकों की पंजीकरण सूची और स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी है।साहब! मेरा अपना चला गया... नहीं चाहिए आर्थिक मदद
प्रशासन की तरफ से जिन पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद लेने के लिए फोन किया जा रहा है उनमें कुछ ऐसे भी हैं जो आर्थिक मदद लेने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना ने उनके अपने की जान ले ली। जब वही इस दुनिया में नहीं रहे तो उनके नाम की आर्थिक मदद लेकर क्या करेंगे। हालांकि डीएम विजय किरन आनंद की पहल पर प्रशासन की तरफ से उनसे अपील की जा रही है कि शासन ने आर्थिक मदद उपलब्ध करा दी है, लिहाजा वे इसे स्वीकार करें। वे चाहें तो इच्छानुसार इस धनराशि का उपयोग मृतकों के नाम से किसी जरूरतमंद की मदद करने या किसी जरूरतमंद बच्चें को गोद लेने या उसे पढ़ाने में खर्च कर सकते हैं।आपदा विभाग के संयोजक गौतम गुप्ता ने बताया कि कई कारणों से कुछ लोगों के नाम सरकारी दस्तावेज में नहीं दर्ज हो सके। शासन की तरफ से ऐसे लोगों के लिए अलग से पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। सभी से आवेदन लिया जा रहा है। सत्यापन के बाद उनके खातों में 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह सूची में दर्ज मृतकों के परिजनों को भी मदद उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि कोई भी पीड़ित परिवार आर्थिक मदद पाने से वंचित न रह जाए।