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Gorakhpur: इलाज में देरी से 35 फीसदी मरीजों की होती है मौत, बस कागजों में ही पूरा हो रहा रिस्पांस टाइम

Fri, 17 Jun 2022 01:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 17 Jun 2022 01:25 PM IST
सार

जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर की दूरी नौ किलोमीटर के करीब है। इसे तय करने में सरकारी एंबुलेंस को 30 से 35 मिनट लग रहे हैं। यह हाल तब है, जब असुरन से लेकर बीआरडी तक फोरलेन बन गया है।

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35 Percentage of patients die due to delay in treatment
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर शहर में भीषण जाम और अतिक्रमण के कारण 30 से 35 फीसदी गंभीर मरीजों की जान चली जाती है। समय से अस्पताल न पहुंचने और या इलाज में देरी की वजह से इन मरीजों की मौत हो जाती है।

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डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मामलों में मरीज बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं, इसकी वजह से उनकी जान बचा पाना मुश्किल हो जाता है। इनमें कार्डियक अरेस्ट, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, आघात, सांस लेने में दिक्कत जैसे मरीज शामिल हैं। ये मरीज आपात स्थिति में अस्पताल समय से नहीं पहुंच पाते। जबकि, इनके लिए एक-एक पल बेहद कीमती होता है। अगर गोल्डन पीरियड में यह मरीज पहुंच जाएं तो जान बचाई जा सकती है।
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चिकित्सकों का मानना है कि हार्ट अटैक के मरीज एक घंटे के अंदर, ब्रेन स्ट्रोक के मरीज दो से तीन घंटे के अंदर, सिर में रक्त प्रवाह तेजी से हो रहा है, तो 30 से 35 मिनट के अंदर, सांस न आने जैसी स्थिति में 20 से 25 मिनट के अंदर मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो जान बचाई जा सकती है। जबकि 50 से 60 फीसदी मरीज दो से तीन घंटे में अस्पताल पहुंचते हैं।

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कागजों में शहरी क्षेत्र में 15 और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट रिस्पांस टाइम

सरकारी और निजी एंबुलेंस की बात करें तो कागजों में इनके रिस्पांस टाइम बेहतर हैं, लेकिन हकीकत इससे परे हैं। यह बात खुद एंबुलेंस चालक और उनके कर्मी स्वीकार करते हैं। ग्रामीण इलाकों में दुर्घटना स्थल पर पहुंचने का रिस्पांस टाइम 20 मिनट और शहरी इलाके में 15 मिनट है। हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में एक से दो घंटे और शहरी इलाके में एक से डेढ़ घंटे में सरकारी और निजी एंबुलेंस पहुंच रही हैं। एंबुलेंस चालकों का कहना है कि जिले में जाम बड़ी समस्या है।


 

नौ किमी दूरी तय करने में लगते हैं 30 से 35 मिनट

जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर की दूरी नौ किलोमीटर के करीब है। इसे तय करने में सरकारी एंबुलेंस को 30 से 35 मिनट लग रहे हैं। यह हाल तब है, जब असुरन से लेकर बीआरडी तक फोरलेन बन गया है।

ग्रीन कॉरिडोर पर चल रहा काम

मरीज को समय से जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचाने के लिए प्रशासन पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर पर काम कर रहा है। इसके तहत बुधवार को ट्रॉयल हुआ, जिसमें 13 मिनट में मरीज को जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बीआरडी के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। जबकि, लक्ष्य नौ से 10 मिनट का था।

ट्रामा सेंटर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि अगर मरीज सही समय पर अस्पताल पहुंच जाए, तो इलाज से उसकी जान बचाई जा सकती है। गंभीर मरीजों के गोल्डेन पीरियड भी तय हैं। इस पीरियड में अगर मरीज पहुंच जाते हैं, तो रिस्क कम हो जाता है, लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में आने वाले कई मरीज समय से नहीं पहुंच पाते हैं, इसकी वजह से जान तक चली जाती है।  
 
एमआरआई जीवीके के प्रोग्राम मैनेजर प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि गोरखपुर में जाम की समस्या काफी है। इस वजह से शहर में 80 फीसदी एंबुलेंस भीड़ में फंस जाती हैं। ऐसे में मरीजों को ले जाने में दिक्कत होती है। फिर भी प्रयास रहता है कि एंबुलेंस समय पर लोगों तक पहुंच सके। इस दिशा में प्रशासन की मदद से ग्रीन कॉरिडोर पर काम शुरू हो चुका है।

 

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