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एक जिला, एक उत्पाद: काला नमक चावल की ब्रांडिंग पर खर्च हुए 35 लाख, गोदामों में नहीं मिल रह बीज

Sat, 29 May 2021 03:57 PM IST
vivek shukla अभिमन्यु चौधरी, सिद्धार्थनगर।
अभिमन्यु चौधरी, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 29 May 2021 03:57 PM IST
सार

‘एक जिला, एक उत्पाद’ प्रोत्साहन योजना में शामिल है काला नमक, कृषि विभाग ने इसके नाम पर आयोजित कराया था महोत्सव

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35 lakhs spent on branding of kala namak rice at siddharth nagar
कालानमक चावल - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

सिद्धार्थनगर जिले में काला नमक धान ‘एक जिला, एक उत्पाद’ प्रोत्साहन योजना में शामिल है। कृषि विभाग ने जिले में हुए काला नमक महोत्सव में इसकी ब्रांडिंग पर 35 लाख रुपये खर्च कर दिए। जिले के सरकारी बीज गोदामों पर काला नमक धान का एक किलो बीज भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण काला नमक धान लगाने के लिए उत्साहित किसानों को गैर प्रमाणित बीज की रोपाई करने की नौबत आ गई है।

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जिले में वर्ष 2018 में काला नमक को ‘एक जिला, एक उत्पाद’ प्रोत्साहन योजना में शामिल किया गया। उसके बाद से किसानों की रूझान इस ओर बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काला नमक की ब्रांडिंग की जा रही है। काला नमक महोत्सव में 250 रुपये किलो काला नमक चावल बिका, लेकिन कृषि विभाग ने सीजन में काला नमक प्रजाति के बीज उपलब्ध कराने का सार्थक प्रयास नहीं किया।
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अधिकारियों के काला नमक के बीज की प्रजाति को नोटिफाइड नहीं किया जा सका है। उम्मीद है कि कई संस्थानों में हो रहे शोध के परिणाम के अनुसार अगले वर्ष तक कृषि विभाग के पास कुछ प्रजातियों के बीज उपलब्ध होंगे। इस कारण किसानों के घर में जो धान रखे हैं उसी की नर्सरी रोपने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ कंपनियों ने अपने बीज बाजार में पहुंचा दिया है। हालांकि कृषि विभाग ने सरकारी बीज गोदामों पर धान की अन्य प्रजातियों के 2000 क्विंटल बीज भेजा गया है।
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नहीं तय है लक्ष्य

कृषि विभाग में बीज उपलब्ध नहीं होने के कारण काला नमक की खेती का लक्ष्य तय नहीं किया गया है। साल पहले जिले में 40 हजार हेक्टेयर काला नमक धान की खेती होती थी, सरकारी उदासीनता के कारण यह घटकर 1000 हेक्टेयर से कम हो गई थी। प्रचार-प्रसार के बाद किसानों में उत्साह बढ़ा है। काला नमक का रकबा 800 हेक्टेयर से बढ़कर पिछले वर्ष 8000 हेक्टेयर तक पहुुंचा। अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष यह रकबा 12 से 14 हजार हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है।

15 जून के बाद बेहन डालें
कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि 15 जून के आसपास नर्सरी लगानी चाहिए और 20-25 दिन बाद रोपनी करनी चाहिए। काला नमक प्रकाश की प्रजाति प्रकाश संवेदी होती है। जब तक दिन 12 घंटे से कम होते हैं, तब तक बाली नहीं निकलती है। अगर काला नमक की प्रजाति की पहले बुवाई कर दी जाए तो उसमें पत्तियां बढ़ती हैं और बाली निर्धारित समय पर निकलती हैं।

इस कारण किसानों का खर्च बढ़ता है और इसका कोई फायदा भी नहीं होता। जब समय से नर्सरी और रोपा लगाया जाता है तो काला नमक चावल की खुशबू अच्छी आती है। बीज की तैयारी एक साल पहले की जाती है। कृषि विभाग या अन्य संस्थाएं जब एक साल पहले इंडेंट भेजेंगी तो कंपनियां बीज उपलब्ध करा सकेंगी।

जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि काला नमक की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसकी ब्रांडिंग से काला नमक चावल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई। काला नमक की प्रजातियों के बीज नोटिफाइड नहीं होने के कारण इस बार गोदामों पर इसका बीज नहीं उपलब्ध नहीं है। कुछ प्रजातियों का इस बार ट्रायल लिया जा रहा है। अगले सीजन में काला नमक का बीज उपलब्ध होगा।

 
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