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Gorakhpur News: मेडिकल कॉलेज में बनेगा 30 बेड का आईसीयू, गंभीर मरीजों को मिलेगी राहत

Thu, 14 Dec 2023 01:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Dec 2023 01:20 AM IST
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30 bed ICU will be built in the medical college, serious patients will get relief
- मेडिकल कॉलेज में अभी 16 बेड का ही है आईसीयू
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- जिला अस्पताल में नहीं है आईसीयू, बीआरडी रेफर होते हैं मरीज

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के वार्ड नंबर तीन में 30 बेड का आईसीयू बनेगा। इमरजेंसी एंड ट्रामा सेंटर में पहले से ही 16 बेड हैं। इसके अलावा दो दिन पहले ही एम्स में भी छह बेड का आईसीयू शुरू किया गया है। इससे गंभीर मरीजों को भर्ती कराने में सुविधा होगी।
नेहरू अस्पताल के अलग-अलग वार्ड में एक हजार मरीज भर्ती करने की सुविधा है। पर, आईसीयू के केवल 16 वार्ड ही हैं। इसके कारण गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ता है। जिला अस्पताल में आईसीयू नहीं होने के कारण वहां के मरीजों को भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही भर्ती कराया जाता है। मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वार्ड नंबर तीन में 30 बेड का आईसीयू शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बेड खरीदकर आ गए हैं। ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाई जा रही है। विभागाध्यक्ष डा. सुनील कुमार आर्या ने बताया कि शीघ्र ही इस आईसीयू वार्ड को चालू कर दिया जाएगा।
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जिला अस्पताल में नहीं है आईसीयू, निजी अस्पतालों में जा रहे मरीज


गोरखपुर। आजाद नगर इलाके की रहने वाली 74 वर्षीया गीता सिंह की रात में अचानक तबियत बिगड़ गई। घरवाले जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर गए। वहां डॉक्टर ने तत्काल आईसीयू की जरूरत बताते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां पता लगा कि सभी बेड फुल हैं। जैसे ही कोई मरीज आईसीयू से बाहर निकलेगा, इन्हें तुरंत भर्ती किया जाएगा। इस दौरान गीता सिंह का ऑक्सीजन लेवल 44 पर पहुंच गया। इस पर घबराए परिजन एक निजी अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती कराया। इलाज से जान तो बच गई, लेकिन तीन दिन का खर्च ही 64 हजार रुपये आ गया। अस्पताल का बिल भरने में पसीने छूट गए।
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ऐसी दिक्कत लोगों को हर दिन झेलनी पड़ती है। क्योंकि चिकित्सा के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे गोरखपुर में अभी भी सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं में खास बदलाव नहीं हो पाया है। 300 बेड के जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं है। जिला अस्पताल में हर दिन करीब ढाई हजार मरीज ओपीडी में ही आते हैं। सबसे बड़ी समस्या क्रिटिकल केस में इलाज की सुविधा को लेकर है। शुगर, ब्लड प्रेशर और एक्सीडेंट के क्रिटिकल केस में अक्सर मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। जबकि सरकारी व्यवस्था में आईसीयू की सुविधा ही सबसे कम है। मंडल स्तरीय अस्पताल में आईसीयू वार्ड न बनाया जाना बड़ा सवाल है।

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कोट-



आईसीयू वार्ड संचालित करने के लिए वेंटिलेटर वाले बेड तथा विशेषज्ञ डॉक्टर व प्रशिक्षित स्टॉफ की जरूरत होती है। 100 बेड टीबी अस्पताल में ऐसी व्यवस्था है। प्रयास किया जा रहा है कि वहां आईसीयू संचालित किया जाए।

डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, सीएमओ
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