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गोरखपुर: गौतम प्रसूति गृह और डॉ. लक्ष्मी सेठ पर 20 लाख का जुर्माना, आयोग ने सुनाया फैसला
Wed, 18 May 2022 03:27 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 18 May 2022 03:27 PM IST
सार
28 दिसंबर 2009 को उनकी गर्भावस्था पूरी होने पर प्रसूति केंद्र में भर्ती किया गया, जहां रात 9:45 बजे शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद शिशु को मां से अलग रखा गया। सर्दी ज्यादा थी। लिहाजा, डॉ. सेठ ने नर्स को निर्देशित किया कि बच्चे को ब्लोवर चलाकर कमरे का तापमान सही करके रखा जाए। नर्स ने ब्लोवर बच्चे के पास रखकर चला दिया, जिससे बच्चे का बायां पैर जलने से जख्म हो गया।
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जुर्माना।
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य राजेंद्र सिंह और सुशील कुमार ने मंगलवार को अलीनगर उत्तरी स्थित गौतम प्रसूति गृह व डॉ. लक्ष्मी सेठ के खिलाफ निर्णय दिया है। आयोग के सदस्यों ने कहा कि वह उपभोक्ता मयंक कुमार उपाध्याय को 20 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करें। इसके अतिरिक्त वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये भी प्रदान करें।
जानकारी के मुताबिक, आयोग के समक्ष शाहपुर थाना क्षेत्र के जंगल तुलसीराम पीएसी कैंप निवासी उपभोक्ता मयंक कुमार उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता अंबरीष कौशल श्रीवास्तव पेश हुए हैं। अधिवक्ता का कहना था कि परिवादी किरन उपाध्याय गर्भवती थीं। गर्भधारण करने के उपरांत से ही वह डॉ. लक्ष्मी सेठ की देखरेख में थीं।
28 दिसंबर 2009 को उनकी गर्भावस्था पूरी होने पर प्रसूति केंद्र में भर्ती किया गया, जहां रात 9:45 बजे शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद शिशु को मां से अलग रखा गया। सर्दी ज्यादा थी। लिहाजा, डॉ. सेठ ने नर्स को निर्देशित किया कि बच्चे को ब्लोवर चलाकर कमरे का तापमान सही करके रखा जाए। नर्स ने ब्लोवर बच्चे के पास रखकर चला दिया, जिससे बच्चे का बायां पैर जलने से जख्म हो गया।
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एक जनवरी 2010 को इस बात की जानकारी होने पर बच्चे को दूसरे हॉस्पिटल में दिखाया गया, जहां प्लास्टिक सर्जन द्वारा बताया गया कि बच्चे के पैर की अंगुलियों में गैंगरीन विकसित हो गई हैं। ऐसा जलने के कारण हुआ है। गैंगरीन का इलाज कठिन होता है।
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जानकारी के मुताबिक, आयोग के समक्ष शाहपुर थाना क्षेत्र के जंगल तुलसीराम पीएसी कैंप निवासी उपभोक्ता मयंक कुमार उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता अंबरीष कौशल श्रीवास्तव पेश हुए हैं। अधिवक्ता का कहना था कि परिवादी किरन उपाध्याय गर्भवती थीं। गर्भधारण करने के उपरांत से ही वह डॉ. लक्ष्मी सेठ की देखरेख में थीं।
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28 दिसंबर 2009 को उनकी गर्भावस्था पूरी होने पर प्रसूति केंद्र में भर्ती किया गया, जहां रात 9:45 बजे शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद शिशु को मां से अलग रखा गया। सर्दी ज्यादा थी। लिहाजा, डॉ. सेठ ने नर्स को निर्देशित किया कि बच्चे को ब्लोवर चलाकर कमरे का तापमान सही करके रखा जाए। नर्स ने ब्लोवर बच्चे के पास रखकर चला दिया, जिससे बच्चे का बायां पैर जलने से जख्म हो गया।
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एक जनवरी 2010 को इस बात की जानकारी होने पर बच्चे को दूसरे हॉस्पिटल में दिखाया गया, जहां प्लास्टिक सर्जन द्वारा बताया गया कि बच्चे के पैर की अंगुलियों में गैंगरीन विकसित हो गई हैं। ऐसा जलने के कारण हुआ है। गैंगरीन का इलाज कठिन होता है।