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नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया से हजारों फिल्मों की ओरिजनल रील कैसे हुई गायब?
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Wed, 13 Sep 2017 10:27 PM IST
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एनएफएआई
- फोटो : Indian Express
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सत्यजीत रे से लेकर कुरोसावा जैसे महान डायरेक्टर्स की फिल्में हो सकता है कि अब आप कभी नहीं देख पाएंगे। नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया की तिजोरी से ढीलेपन से हजारों फिल्मों की ओरजिनल रील्स गायब हो गई हैं। इसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ है, जिसमें 52 हजार रील के डिब्बे गायब हो गए हैं, तो करीब 9200 फिल्मों की पूरी की पूरी रील ही।
जानकारी के मुताबिक नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के पास 1.3 फिल्मों की रील्स थी। साल 2012 में एनएफएआई के मुताबिक उसके यहां 1.3 लाख फिल्मों की रील्स मौजूद थी। इनमें से 51 हजार 500 डिब्बे और 9200 प्रिंट गायब हैं। कंपनी को इसका पता जांच के दौरान पता चला। जो आरटीआई का जवाब देने के लिए जांची गई। ये फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं।
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जानकारी के मुताबिक नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के पास 1.3 फिल्मों की रील्स थी। साल 2012 में एनएफएआई के मुताबिक उसके यहां 1.3 लाख फिल्मों की रील्स मौजूद थी। इनमें से 51 हजार 500 डिब्बे और 9200 प्रिंट गायब हैं। कंपनी को इसका पता जांच के दौरान पता चला। जो आरटीआई का जवाब देने के लिए जांची गई। ये फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं।
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फर्म को दी थी सभी रील्स पर बारकोड लगाने की जिम्मेदारी
गायब फिल्मों में मशहूर भारतीय फिल्मकारों और विदेशी फिल्मकारों की क्लासिक फिल्में भी शामिल हैं। दरअसल 2010 में नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने पुणे की एक फर्म को अपनी सभी रील्स पर बारकोड लगाने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन कंपनी को इस दौरान पता लगा कि कई फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं।
गायब होने वाले प्रिंट्स में सत्यजीत रे की 'पाथेर पंचाली' , मेहबूब खान की 'मदर इंडिया', राज कपूर की 'मेरा नाम जोक'र और 'अवारा' और गुरु दत्त की 'कागज के फूल' समेत कई निर्देशकों की फिल्मों के प्रिंट गायब हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों के प्रिंट्स भी मिसिंग हैं। इनमें 'बैटलशिप पोटेमकिन', 'बाइसाइकिल थीफट, जापानी फिल्मकार अकीरा कुरोसोवा की 'सेवन समुराय' 'नाइफ इन द वाटर' जैसी फिल्मों के अलावा सौ से ज्यादा साइलेंट फिल्में भी गायब हैं। यही नहीं, नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के पास से 401 डीवीडी भी गायब हैं।
इस जानकारी के सामने आने के बाद ये बात बिल्कुल साफ है कि नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के ढीले रवैये की वजह से अब दर्शकों को वो फिल्में कभी नहीं देखने को मिल सकेंगी, जो पूरी दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं।
गायब होने वाले प्रिंट्स में सत्यजीत रे की 'पाथेर पंचाली' , मेहबूब खान की 'मदर इंडिया', राज कपूर की 'मेरा नाम जोक'र और 'अवारा' और गुरु दत्त की 'कागज के फूल' समेत कई निर्देशकों की फिल्मों के प्रिंट गायब हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों के प्रिंट्स भी मिसिंग हैं। इनमें 'बैटलशिप पोटेमकिन', 'बाइसाइकिल थीफट, जापानी फिल्मकार अकीरा कुरोसोवा की 'सेवन समुराय' 'नाइफ इन द वाटर' जैसी फिल्मों के अलावा सौ से ज्यादा साइलेंट फिल्में भी गायब हैं। यही नहीं, नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के पास से 401 डीवीडी भी गायब हैं।
इस जानकारी के सामने आने के बाद ये बात बिल्कुल साफ है कि नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के ढीले रवैये की वजह से अब दर्शकों को वो फिल्में कभी नहीं देखने को मिल सकेंगी, जो पूरी दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं।