‘शोनार बांग्ला’ की फिर हो रही चर्चा, जानिए क्या है इसका अर्थ और इतिहास
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीते दिनों पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। पश्चिम बंगाल में पहुंचकर अमित शाह ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो फिर से ‘शोनार बांग्ला’ बनाएंगे। पश्चिम बंगाल का जिक्र होते ही ‘शोनार बांग्ला’ की भी चर्चा चल पड़ती है।
‘शोनार बांग्ला’ दरअसल ‘आमार शोनार बांग्ला’ गीत से लिया गया है जिसका अर्थ होता है ‘मेरा सोने का बंगाल।‘ इसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने बांग्ला भाषा में लिखा। यह गीत अब बांग्लादेश का राष्ट्रगान है। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे बंग भंग के समय 1905 में लिखा था, जब अंग्रेजों ने धर्म के आधार पर पहली बार बंगाल का विभाजन किया था। 19 जुलाई को वायसरॉय ऑफ इंडिया लॉर्ड कर्जन ने बंगाल के बंटवारे का एलान किया और यह 16 अक्तूबर से लागू हुआ। वहीं इस गीत की पंक्तियां पहली बार सितंबर 1905 में ‘बंगदर्शन’ नाम की एक मैगजीन में प्रकाशित हुईं।
रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी इंदिरा देवी ने इसे सुनने के बाद इसके म्यूजिकल नोटेशन को देखा।गीत के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की थी कि सभी लोग बंगाल को एक समान रूप से प्यार करते हैं। बांग्लादेश बनने के बाद साल 1971 में इस गीत की शुरुआती 10 पंक्तियों को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकृत किया गया। इसके वाद्य आर्केस्ट्रा को समर दास ने संगीतबद्ध किया था।बंगाली सिनेमा में रवींद्रनाथ टैगोर के इस गीत का खूब प्रयोग हुआ है। अलग अलग गायकों ने इसका वर्जन गाया है।
आमार शोनार बांग्ला गीत
आमार शोनार बांग्ला, आमि तोमाय भालोबाशी,
चिरोदिन तोमार आकाश, तोमार बाताश, आमार प्राने बाजाई बाशी।
ओ मां, फागुने तोरे आमेर बोने, घ्राने पागल कोरे, मोरी होय, होय रे,
ओ मां, ओघ्राने तोर भोरा खेते, आमी कि देखेछी मोधुर हाशी।
की शोभा, की छाया गो, स्नेहो, की माया गो, की आचोल बिछाइछो,
बोतेर मूले, नोदिर कूले कूले,
मां, तोर मुखेर बानी, आमार काने लागे, शुधार मोतो, मोरी होय, होय रे,
मां, तोर बोदोनखानी मोलीन होले, आमि नोयोन जॉले भाशी।
हिंदी में अर्थ
मेरे सोने की तरह बंगाल, मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम्हारा आसमान, तुम्हारी हवा, हमेशा मेरे प्राणों में बांसुरी बजाती है।
ओ मां, फागुन में आमों के जंगल से आती खुशबू मुझे पागल करती है। क्या आनंद है।
ओ मां, आषाढ़ के महीने में फूले हुए धान के खेत, मैं क्या देखता हूं कि एक मधुर सी मुस्कान। क्या शोभा है, क्या छाया, क्या स्नेह, क्या माया, क्या आंचल बिछाया है। बरगद के नीचे, नदी के किनारे किनारे।
मां, तुम्हारे मुख की वाणी, मेरे कानों को शहद की तरह लगती है। क्या आनंद है। मां अगर तुम्हारे चेहरे पर उदासी आती है तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं।